भूपेश बघेल पर ईडी रेड के विरोध में कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन, रायपुर मास्टर प्लान की अनियमितताओं पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को ईडी की कार्रवाई और मास्टर प्लान के मुद्दे पर जमकर सियासी घमासान देखने को मिला। कांग्रेस विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी को लेकर सदन में हंगामा किया, तो दूसरी ओर भाजपा विधायक राजेश मूणत ने रायपुर शहर के मास्टर प्लान में अनियमितताओं को लेकर सवाल दागे।
रायपुर। विधानसभा में सोमवार को राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया, जब कांग्रेस विधायकों ने भूपेश बघेल पर ईडी की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंचने की कोशिश की। इस दौरान कई विपक्षी विधायकों को सस्पेंड कर दिया गया। नाराज कांग्रेस विधायक सदन से बाहर निकलकर गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए, जिसके चलते कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने कहा, “जब कवासी लखमा के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, तब कांग्रेस ने साथ नहीं दिया। ये आदिवासी विरोधी मानसिकता का परिचय है।” इसी बीच, कांग्रेस विधायक दल की बैठक विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत की अगुवाई में हुई, जिसमें निलंबित विधायकों को मनाने के प्रयास किए गए। डिप्टी सीएम अरुण साव भी महंत के कक्ष पहुंचे और निलंबन हटाए जाने की जानकारी साझा की।
दूसरी ओर, ध्यानाकर्षण के दौरान रायपुर विधायक राजेश मूणत ने मास्टर प्लान में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि आवासीय क्षेत्रों को मनमाने ढंग से व्यावसायिक या शैक्षणिक ज़ोन में बदला गया है, क्या इस पर कोई कार्रवाई हुई? जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री ओपी चौधरी ने स्वीकार किया कि मास्टर प्लान को लेकर शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि एक जांच समिति का गठन कर दिया गया है, जो इन बिंदुओं की जांच कर रही है।
राजेश मूणत ने यह भी पूछा कि मास्टर प्लान बनाने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी। मंत्री चौधरी ने बताया कि इस प्रक्रिया में IAS जयप्रकाश मौर्य, संदीप बागडे, भानु प्रताप सिंह पटेल, कमल सिंह, रोजी सिन्हा, मेघा चवढ़ा सहित कुल 15 अधिकारियों की भूमिका रही है।