DVCM और ACM स्तर के माओवादियों ने छोड़ी हिंसा, बॉर्डर ऑपरेशन से संगठन पर बढ़ा दबाव
जगदलपुर। छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर अब नक्सली संगठनों पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में तेलंगाना के भद्रादि कोत्तागुडेम में 64 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले से जुड़े सक्रिय नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कई DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर) और ACM (एरिया कमेटी मेंबर) स्तर के नक्सली शामिल हैं, जो संगठन की रीढ़ माने जाते थे।
तेलंगाना पुलिस के सामने हथियार डालते समय नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की बात कही। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्रों में संयुक्त ऑपरेशन और समन्वयपूर्ण रणनीति के चलते नक्सलियों की गतिविधियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। पिछले 15 महीनों में बस्तर क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने 300 से अधिक नक्सलियों को मुठभेड़ में ढेर किया है, वहीं 286 से ज्यादा हथियार बरामद किए गए हैं। इस दबाव के चलते माओवादी संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि 2026 तक देश को माओवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की संयुक्त रणनीति और समन्वय इस दिशा में तेजी से परिणाम दे रही है। बॉर्डर ऑपरेशनों की सघनता ने नक्सलियों के मूवमेंट को सीमित कर दिया है, जिससे अब वे संगठित रहना मुश्किल पा रहे हैं।