राष्ट्रपति ने विधानसभा रजत जयंती समारोह में कहा – छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोगों ने दिल जीत लिया
छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य की संस्कृति, लोगों और संभावनाओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से उनका विशेष जुड़ाव है और यहां के लोगों की सरलता उन्हें हमेशा खींच लाती है। उन्होंने अपने संबोधन में नक्सलवाद के अंत की उम्मीद जताई और राज्य को भारत माता का प्रतीक बताया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने ओजपूर्ण संबोधन में राज्य के प्रति अपने गहरे लगाव को व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ से मुझे आत्मीय लगाव है। मैं 5-6 बार यहां आ चुकी हूं और हर बार यहां की संस्कृति, सादगी और लोगों की आत्मीयता ने मन मोह लिया।”
राष्ट्रपति ने कहा, “आप जैसे बरगढ़, संबलपुर को छत्तीसगढ़ का हिस्सा मानते हैं, वैसे ही हम भी रायपुर को ओडिशा का हिस्सा मानते हैं। परिसीमन की भौगोलिक सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन दिल की कोई दीवार नहीं होती।” अपने भाषण की शुरुआत ‘जय जोहार’ से करते हुए राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा की और जगन्नाथ मंदिर के भोग में प्रयुक्त चावल के छत्तीसगढ़ से जुड़ाव को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ नारी शक्ति का प्रतीक है। मिनीमाता जैसी प्रेरणादायी महिलाओं ने यहां समाज कल्याण और महिला सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है।” साथ ही उन्होंने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया।
राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्य प्रणाली की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि अब तक 565 विधेयक पारित किए जा चुके हैं, जिनमें सामाजिक विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि राज्य में नक्सलवाद का अंत निकट है और प्रभावित क्षेत्र विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने राज्य में सीमेंट, खनिज, स्टील, एल्यूमिनियम और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं होने की बात कही।
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने बताया कि अब तक छत्तीसगढ़ विधानसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ महिलाओं की सहभागिता भी बढ़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि सदन में 90 सदस्यों में से 19 महिलाएं, 30 जनजातीय, 10 अनुसूचित जाति, 35 ओबीसी और 15 सामान्य वर्ग के सदस्य हैं।