ग्रुप सरेंडर पर इनाम दोगुना, LMG लाने पर 5 लाख का बोनस; मकान, नौकरी और ट्रेनिंग की गारंटी
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति लाने के लिए अब तक की सबसे बड़ी आत्मसमर्पण नीति लागू कर दी है। नई “नक्सली आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति 2025” के तहत माओवादियों को सिर्फ 120 दिन में सामान्य जीवन में लौटने का मौका मिलेगा। इस योजना में समूह में आत्मसमर्पण करने वालों को उनके ऊपर घोषित इनाम की राशि दोगुनी करके दी जाएगी।
हथियार के साथ सरेंडर करने पर अतिरिक्त नकद इनाम
LMG लाने पर 5 लाख,
AK-47 के लिए 4 लाख का अतिरिक्त इनाम तय किया गया है।
सरकार का मानना है कि इससे बड़े और खतरनाक हथियारों को जंगलों से बाहर लाने में मदद मिलेगी।
पति-पत्नी दोनों सरेंडर पर डबल बेनिफिट
यदि पति-पत्नी दोनों नक्सली हैं और एक साथ सरेंडर करते हैं, तो उन्हें अलग-अलग यूनिट माना जाएगा और पुनर्वास योजना के तहत दोनों को लाभ मिलेगा।
गांव को नक्सल मुक्त बनाने पर 1 करोड़ का विकास कार्य
अगर किसी पंचायत क्षेत्र के सभी सक्रिय नक्सली और मिलिशिया सदस्य सरेंडर करते हैं, और गांव नक्सल मुक्त घोषित हो जाता है, तो उस गांव में 1 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे। यह योजना खासकर सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा जैसे अति नक्सल प्रभावित जिलों के लिए लागू की गई है।
120 दिन में पूरा होगा पुनर्वास
सरेंडर करने वाले नक्सलियों को ट्रांजिट कैंप या पुनर्वास केंद्र में रखा जाएगा। जहां उन्हें उनकी रुचि के अनुसार स्किल ट्रेनिंग, शिक्षा और व्यवसाय की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही:
- हर महीने ₹10,000 मानदेय तीन साल तक
- शहरी क्षेत्र में आवासीय प्लॉट या गांव में खेती की जमीन
- स्वरोजगार योजनाओं में प्राथमिकता
केस खत्म करने की भी मिलेगी सुविधा
सरेंडर करने वालों के खिलाफ दर्ज मामले 6 महीने के अच्छे आचरण के बाद राज्य सरकार की मंजूरी से खत्म किए जा सकते हैं। यह फैसला कैबिनेट स्तर पर होगा।
सरकार का उद्देश्य: हिंसा से मुख्यधारा की ओर वापसी
छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई नीति माओवादियों को हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन की ओर प्रेरित करने का प्रयास है। इस नीति के माध्यम से सरकार जंगल की लड़ाई को खत्म कर विकास, शिक्षा और रोजगार के रास्ते खोलने की रणनीति पर काम कर रही है।