भारत-पाक तनाव, महंगाई के आंकड़े, कंपनियों के रिजल्ट और विदेशी निवेशकों की चाल तय करेगी बाजार की दिशा
भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते कई घरेलू और वैश्विक कारकों के असर में रह सकता है। भारत-पाक सीमा पर जारी तनाव, महंगाई के नए आंकड़े, बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार में उतार-चढ़ाव तय माना जा रहा है। टेक्निकल विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी में कमजोरी बनी रही तो यह 23,200 के स्तर तक फिसल सकता है।
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। कई अहम घटनाएं और आँकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। सबसे बड़ा असर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा तनाव का हो सकता है। भले ही सीजफायर की घोषणा हो चुकी हो, लेकिन ड्रोन हमलों और गोलीबारी की खबरें निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती हैं।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि सीजफायर के कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान की ओर से उकसावे की कार्रवाई की गई, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। निवेशक इस घटनाक्रम पर सतर्क नजर रखे हुए हैं।
दूसरा बड़ा फैक्टर है महंगाई दर। रिटेल महंगाई के अप्रैल के आंकड़े 12 मई को जारी होंगे। उम्मीद की जा रही है कि ये 3% से नीचे रह सकती है, जो बाजार के लिए राहत की खबर हो सकती है। इसके साथ ही थोक महंगाई के आंकड़े भी इस सप्ताह सामने आएंगे। तीसरा अहम ट्रिगर है कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे। इस सप्ताह टाटा स्टील, एयरटेल, सिप्ला, टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिजल्ट जारी करेंगी, जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी।
चौथे फैक्टर के तौर पर, IPO सेगमेंट में हलचल बनी रहेगी। SME सेगमेंट में दो IPO खुल रहे हैं जबकि दो की लिस्टिंग भी होनी है। पांचवां महत्वपूर्ण पक्ष है विदेशी निवेशकों की भागीदारी। पिछले सप्ताह FIIs ने ₹5,087 करोड़ और DIIs ने ₹10,450 करोड़ की खरीदारी की थी। यदि यह रुझान जारी रहा तो बाजार को सहारा मिल सकता है।
टेक्निकल व्यू:
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट अजीत मिश्रा का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर इमिडिएट सपोर्ट है। यदि ये टूटता है तो बाजार 23,200 तक गिर सकता है। वहीं, ऊपर की ओर 24,400 से 24,600 के बीच मजबूत रजिस्टेंस देखा जा रहा है।