570 करोड़ के कोयला लेवी घोटाले में जमानत पर बाहर होंगे रानू, सौम्या, विश्नोई और सूर्यकांत; गवाहों को प्रभावित न करने के निर्देश, EOW केस में जेल में रहना होगा जारी
छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला घोटाले में फंसे चार प्रमुख आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। गवाहों पर असर न पड़े, इसलिए उन्हें राज्य में रहने की इजाजत नहीं होगी। हालांकि अन्य मामलों के चलते फिलहाल उनकी जेल से रिहाई संभव नहीं है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले में फंसे रानू साहू, सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई और सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। यह जमानत सशर्त है – कोर्ट ने चारों आरोपियों को छत्तीसगढ़ में रहने से फिलहाल रोक दिया है, ताकि गवाहों को प्रभावित न किया जा सके।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चारों आरोपी जांच एजेंसियों और ट्रायल कोर्ट के समक्ष जरूरत के अनुसार उपस्थित रहेंगे, और एक सप्ताह के भीतर राज्य से बाहर अपने रहने के स्थान की जानकारी संबंधित थानों में प्रस्तुत करेंगे।
इसके साथ ही सभी को अपने-अपने पासपोर्ट विशेष अदालतों में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण) में दर्ज अन्य मामलों की वजह से फिलहाल उनकी जेल से रिहाई संभव नहीं हो पाएगी।
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के अनुसार, यह घोटाला करीब 570 करोड़ रुपये का है। आरोप है कि एक संगठित सिंडिकेट के ज़रिए कोल व्यापारियों से प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की गई। इस घोटाले के पीछे कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
ईडी की जांच में सामने आया कि परमिट प्रक्रिया को जानबूझकर ऑफलाइन किया गया ताकि वसूली को संस्थागत रूप दिया जा सके। तत्कालीन खनिज संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 2020 में इसके लिए आदेश जारी किया था।
इस केस में निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई, सूर्यकांत तिवारी सहित कई अन्य आरोपी पहले से जेल में हैं। कोर्ट के आदेश के बाद भी वे EOW मामलों के चलते जेल में ही रहेंगे।