वीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट राजीव पांडे और नायक कौशल यादव की स्मृतियों को संजोने की मांग, अधूरे स्मारकों पर सियासत गरमाई
सियाचिन और कारगिल की रणभूमि पर दुश्मनों को धूल चटाने वाले दो वीर सपूत – लेफ्टिनेंट राजीव पांडे और नायक कौशल यादव की शहादत को देश कभी नहीं भूल सकता। लेकिन दुखद पहलू यह है कि उनकी याद में बनाए जाने वाले स्मारक आज भी अधूरे हैं। डेढ़ साल पहले हुआ भूमिपूजन भी धरातल पर आकार नहीं ले सका है। ऐसे में नेताओं और पूर्व सैनिकों ने एकजुट होकर न्याय और सम्मान की आवाज बुलंद की है।
रायपुर। सियाचिन की बर्फीली ऊंचाइयों पर दुश्मनों से लोहा लेकर मातृभूमि पर प्राण निछावर करने वाले वीर चक्र विजेता शहीद सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव पांडे के स्मारक का सपना अब भी अधूरा है। 29 मई 1987 को 25 वर्ष की आयु में शहीद हुए इस जांबाज को याद करते हुए उनकी पुण्यतिथि पर रायपुर में कांग्रेस नेताओं और पूर्व सैनिकों ने मौन धरना दिया और सरकार से स्मारक निर्माण की मांग दोहराई।
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश दुबे ने शहीद के परिजनों से मुलाकात की और बुजुर्ग माता-पिता को सम्मानित किया। बाद में सभी नेता जीई रोड स्थित अनुपम गार्डन पहुंचे, जहां स्मारक बनाए जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने स्मारक स्थल पर शांतिपूर्ण धरना देकर अपनी नाराजगी जताई।

विकास उपाध्याय ने बताया कि 11 सितम्बर 2023 को कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शहीद राजीव पांडे स्मारक का भूमिपूजन हुआ था, लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद काम रुक गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शहीदों के सम्मान के प्रति गंभीर नहीं है।
पूर्व विधायक ने यह भी बताया कि कारगिल युद्ध के हीरो, नायक कौशल यादव के नाम पर बनाए जा रहे स्मारक का काम भी अधूरा है। यादव ने कारगिल में अकेले 30 पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लिया था और पांच को मौत के घाट उतारा। उन्हें भी वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
शहीद राजीव पांडे की प्रतिमा पर मंगलवार को पूर्व सैनिकों, महापौर मीनल चौबे और परिजनों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पूर्व सैनिक सेवा परिषद के पदाधिकारी और शहीद के भाई सुनील पांडे मौजूद रहे।
शहीद लेफ्टिनेंट राजीव पांडे को ऑपरेशन मेघदूत के तहत सियाचिन में दुश्मनों की पोस्ट पर कब्जा करने का जिम्मा सौंपा गया था। दुर्गम बर्फीले रास्तों को पार करते हुए उन्होंने अद्भुत साहस का परिचय दिया और बलिदान देकर भारत को विजय दिलाई। उन्हें 26 जनवरी 1988 को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
नायक कौशल यादव, जो 9 पैरा यूनिट में स्क्वाड कमांडर थे, ने 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों से मुकाबला किया। उनके अभूतपूर्व साहस को आज भी भिलाई और देश गौरव से याद करता है। अब परिजन, पूर्व सैनिक और नागरिक समाज, सरकार से यह सवाल पूछ रहे हैं – “क्या देश के वीर सपूतों के सम्मान की प्रतीक्षा को और लंबा खींचा जाएगा?”