-
खुद को पश्चिम बंगाल का बताकर रह रहे थे रायपुर में
-
फर्जी मार्कशीट के आधार पर बनवाया पासपोर्ट
-
पार्षद समेत कई स्थानीय लोगों पर संदेह
-
बच्ची का स्कूल में एडमिशन, इलाके में नहीं हुआ किसी को शक
-
बांग्लादेशी नंबरों से संपर्क, देश-वापसी की प्रक्रिया पर विचार
रायपुर में एक बड़ी कार्रवाई के तहत पुलिस ने 16 साल से फर्जी दस्तावेज के आधार पर रह रहे बांग्लादेशी पति-पत्नी को गिरफ्तार किया। दोनों ने अपने पड़ोसियों तक को गुमराह किया और खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताया। इस मामले में जिन लोगों ने उनकी पहचान वैध दिखाने में मदद की, उनकी भूमिका भी जांच के घेरे में है, जिनमें स्थानीय पार्षद भी शामिल हैं।
रायपुर। राजधानी रायपुर में शनिवार को पुलिस ने एक बांग्लादेशी दंपती को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 16 वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय नागरिक बनकर रह रहे थे। मोहम्मद दिलावर खान (49) और उसकी पत्नी परवीन बेगम (45) ने खुद को पश्चिम बंगाल निवासी बताकर आधार कार्ड, पासपोर्ट, और स्कूल में अपनी बेटी का एडमिशन तक करवा लिया था।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी दंपती रायपुर के धरमनगर इलाके में किराए के मकान में रह रहे थे और अंडा-बिरयानी की ठेली लगाकर जीवन यापन कर रहे थे। इलाके के लोगों को कभी भी उन पर शक नहीं हुआ क्योंकि वे आम परिवार की तरह शांत जीवन जी रहे थे।
हालांकि जब पुलिस ने अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों की जांच शुरू की, तब दिलावर की 8वीं की मार्कशीट संदेहास्पद लगी। इसमें दिखाया गया कि उसने वर्ष 2009-10 में नियमित रूप से स्कूल जाकर पढ़ाई की, जबकि उस समय उसकी उम्र 35 वर्ष थी। इस फर्जी मार्कशीट के आधार पर उसने पासपोर्ट भी बनवा लिया, जिससे संदेह और गहराया। जांच में पता चला कि दिलावर बांग्लादेश के मुख्तारपुर, मुंशीगंज थाना क्षेत्र का मूल निवासी है और उसने भारत में नागपुर, मुंबई और अंत में रायपुर जैसे शहरों में निवास किया।
पुलिस ने पाया कि उसका बांग्लादेश से लगातार संपर्क बना रहा, वह 16 वर्षों में 4 बार बांग्लादेश गया और वापस आया, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि उसके संबंध किसी संदिग्ध नेटवर्क से हो सकते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि दंपती ने अपनी 14 साल की बेटी को भी रायपुर के एक निजी स्कूल में कक्षा 9वीं में पढ़ा दिया, जिससे यह साफ है कि पूरे परिवार की पहचान को ‘भारतीय’ साबित करने की पूरी कोशिश की गई।
पुलिस ने अब फर्जी दस्तावेज बनाने में सहयोग करने वालों पर फोकस बढ़ा दिया है, जिसमें स्थानीय पार्षद और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन एजेंसियां भी शक के घेरे में हैं। इन सभी को नोटिस जारी किया जाएगा।