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2008 में ग्लोबल क्राइसिस के दौरान ₹500 करोड़ में खरीदी थी 4.9% हिस्सेदारी
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अब ICICI प्रूडेंशियल और SBI म्यूचुअल फंड को बेच दी पूरी होल्डिंग
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डिविडेंड मिलाकर कुल मुनाफा ₹10,500 करोड़ तक, 24 गुना रिटर्न
मुकेश अंबानी की निवेश दृष्टि ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। एशियन पेंट्स में साल 2008 में की गई 500 करोड़ की रणनीतिक हिस्सेदारी ने 17 साल बाद रिलायंस को ₹9,000 करोड़ से भी ज्यादा का मुनाफा दिया है। यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे सफल दीर्घकालिक निवेश कहानियों में गिनी जा रही है।
मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 2008 में जब वैश्विक मंदी का दौर था, उस समय एशियन पेंट्स की 4.9% हिस्सेदारी ₹500 करोड़ में खरीदी थी। अब 17 साल बाद, इस निवेश ने उन्हें ₹9,080 करोड़ का शुद्ध लाभ दिया है। यदि डिविडेंड सहित लाभ जोड़ा जाए, तो यह आंकड़ा ₹10,500 करोड़ तक पहुंच जाता है।
यह हिस्सेदारी रिलायंस की सहायक कंपनी सिद्धांत कॉमर्शियल्स के जरिए बेची गई है। बिक्री दो चरणों में हुई — पहला, SBI म्यूचुअल फंड को 3.5 करोड़ शेयर ₹7,704 करोड़ में और दूसरा, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड को 87 लाख शेयर ₹1,876 करोड़ में बेचे गए। औसतन ये सौदे ₹2,200 प्रति शेयर के मूल्य पर हुए हैं।
बेचने के पीछे की रणनीति:
हाल के वर्षों में एशियन पेंट्स को बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर बिड़ला ओपस पेंट्स जैसे नए खिलाड़ियों से। एलारा सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, FY25 में कंपनी का मार्केट शेयर 59% से घटकर 52% तक आ गया है। ऐसे में स्टॉक की ग्रोथ धीमी हुई है और रिलायंस को लाभ बुक करने का यह सही समय लगा।
पांच साल पहले भी रिलायंस इस हिस्सेदारी को बेचने की योजना बना चुकी थी, लेकिन तब जियो में भारी निवेश के कारण डील नहीं हो सकी थी।
एशियन पेंट्स की विरासत और विस्तार:
1942 में चार दोस्तों द्वारा शुरू की गई एशियन पेंट्स आज भारत की सबसे बड़ी डेकोरेटिव पेंट कंपनी है, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 18.5 लाख किलो लीटर है। कंपनी के पास देशभर में 74,000 से अधिक डीलर्स का नेटवर्क है। फिलहाल यह 15 देशों में मौजूद है और 60 से अधिक देशों में अपने उत्पाद निर्यात करती है।
मुकेश अंबानी का यह निवेश बताता है कि दीर्घकालिक सोच और सही समय पर की गई रणनीतिक खरीदारी से कैसे अरबों का मुनाफा कमाया जा सकता है। यह सौदा न केवल रिलायंस के लिए लाभदायक रहा, बल्कि भारत की निवेश संस्कृति के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी बन गया है।