ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कड़ी कार्रवाई, रात 10 बजे के बाद डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित
भिलाई। आगामी त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के डीजे संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष, भिलाई में आयोजित की गई। यह बैठक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग एवं नगर पुलिस अधीक्षक भिलाई नगर की मौजूदगी में सम्पन्न हुई, जिसमें जिलेभर से लगभग 100 डीजे संचालकों ने भाग लिया।
बैठक में पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सार्वजनिक स्थलों, धार्मिक जुलूसों एवं कार्यक्रमों में डीजे और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू रहेंगे। संचालकों को बताया गया कि किसी भी शासकीय संपत्ति अथवा सार्वजनिक स्थल पर उपकरणों के उपयोग से पूर्व संबंधित कार्यालय से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
ध्वनि स्तर के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि किसी भी स्थिति में ध्वनि का स्तर 75 डेसिबल (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए, और यदि परिवेश ध्वनि स्तर कम है तो उससे 10 डेसिबल (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक डीजे सहित किसी भी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, वाहनों पर वाद्य यंत्र या डीजे सिस्टम का उपयोग पूर्णतः निषिद्ध होगा।


अधिकारियों ने बताया कि सभी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, न्यायालय एवं शासकीय कार्यालयों के 100 मीटर के दायरे को ‘शांत क्षेत्र’ (Zone of Silence) घोषित किया गया है, जहाँ ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। आयोजन स्थलों पर मार्ग को अवरुद्ध करना या आमजन को असुविधा पहुँचाना दंडनीय होगा, और ऐसी स्थिति में कार्यक्रम की अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
पुलिस ने डीजे संचालकों को चेताया कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, एनजीटी के दिशा-निर्देश, और उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उपस्थित संचालकों ने नियमों के पालन का आश्वासन देते हुए प्रशासन को सहयोग का भरोसा दिलाया।