राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बैज का पलटवार, बोले – जंगल कट रहे हैं, वन मंत्री पद छोड़ें; बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासी राजनीति का आरोप लगाया
दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर पहुंचते ही वन मंत्री केदार कश्यप पर हमला बोल दिया। बैज ने उन्हें हसदेव, तमनार और बैलाडीला क्षेत्र चलने की चुनौती देते हुए कहा कि ज़मीनी सच्चाई देखकर उनकी “पैंट गीली हो जाएगी”। उन्होंने आदिवासी मुद्दों पर मंत्री कश्यप की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर चुनावी आदिवासी राजनीति का आरोप लगाया।
रायपुर, 16 जुलाई। दिल्ली में राहुल गांधी के साथ आदिवासी नेताओं की बैठक के बाद छत्तीसगढ़ लौटे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने वन मंत्री केदार कश्यप पर तीखा प्रहार किया। बैज ने कहा कि अगर कश्यप को लगता है कि प्रदेश में आदिवासियों का विकास हो रहा है, तो वे उनके साथ हसदेव, तमनार और बैलाडीला चलें और वहां की हकीकत देखें।
बैज ने कटाक्ष करते हुए कहा, “अगर मंत्री जी वहां की सच्चाई सुन लेंगे, तो उनकी पैंट गीली हो जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि जंगल कट रहे हैं, खनन हो रहा है और आदिवासियों को विस्थापन झेलना पड़ रहा है, फिर भी वन मंत्री मौन हैं।
बैज यहीं नहीं रुके। उन्होंने मंत्री से पूछा कि 16 साल 8 महीने सरकार में रहने के बावजूद उन्होंने आदिवासियों के लिए क्या किया? उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने बस्तर के हजारों आदिवासियों को फर्जी नक्सली मामलों में जेल भेजा, 3500 स्कूल बंद किए और तेंदूपत्ता संग्राहकों की योजनाएं भी समाप्त कर दीं। उन्होंने कहा कि बीजापुर में रसोइया महेश कुडियाम की हत्या और शहीद महेंद्र कर्मा बीमा योजना की बंदी पर भी मंत्री ने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बैज ने केदार कश्यप से कहा, “आप उस कुर्सी पर बने रहने के काबिल नहीं हैं, जहां जंगल बचाने की जिम्मेदारी हो, लेकिन खुद जंगल ही कट रहे हों।”
दूसरी ओर, बीजेपी ने कांग्रेस पर आदिवासी हितों को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस को आदिवासी तभी याद आते हैं जब चुनाव करीब होते हैं, जबकि टिकट वितरण में उन्हीं को दरकिनार कर दिया जाता है।
केदार कश्यप ने राहुल गांधी की आदिवासी नेताओं से बैठक को “पाखंड” करार देते हुए कहा था कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों के साथ केवल छल और धोखा हुआ है। उन्होंने बैज पर तंज कसते हुए कहा था कि कांग्रेस के नेताओं में राहुल गांधी से कड़े सवाल पूछने की हिम्मत नहीं है। कश्यप ने यह भी आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में राज्यसभा की तीनों सीटें छत्तीसगढ़ के नेताओं को न देकर “बेच दी गईं” और आदिवासियों के हक में कोई आवाज़ नहीं उठी। इस पूरे सियासी विवाद ने एक बार फिर आदिवासी राजनीति को प्रदेश की मुख्यधारा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।