ब्रिटिश कालीन दंडात्मक कानूनों में संशोधन, कारोबार और आम जीवन को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ‘जनविश्वास विधेयक’ को पारित कर देश में एक नई मिसाल कायम की है। अब राज्य में छोटे प्रशासनिक या व्यापारिक उल्लंघनों के लिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा, बल्कि सिर्फ जुर्माना लगाया जाएगा। यह विधेयक ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ की दिशा में राज्य सरकार का एक प्रगतिशील प्रयास है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को जनविश्वास विधेयक 2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह विधेयक राज्य में शासन प्रणाली को अधिक सरल, नागरिक हितैषी और व्यवसाय अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस विधेयक के तहत अब छोटी-मोटी प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होगा, बल्कि सिर्फ आर्थिक दंड (जुर्माना) का प्रावधान होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विधेयक को विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित नई न्याय संहिता की भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने यह विधेयक लाया है। मध्यप्रदेश के बाद यह कानून पारित करने वाला छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचाने, न्यायिक प्रणाली पर दबाव कम करने और राज्य में व्यावसायिक माहौल को आसान बनाने का काम करेगा। अब उन कानूनों में संशोधन किया गया है जो अंग्रेजों के जमाने से लागू थे और सामान्य चूक को भी आपराधिक अपराध की श्रेणी में रखते थे।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार ऐसी नीतियों को बढ़ावा देना चाहती है जो संवेदनशील, व्यावहारिक और जनहित में हों। यह कानून सजा देने की बजाय सुधार और मार्गदर्शन की दिशा में कार्य करेगा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।