हाईकोर्ट ने दोहराया- प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी हत्या से बड़ा अपराध; लाखों युवाओं के साथ धोखा
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020 की परीक्षा में हुए घोटाले ने एक बार फिर न्यायिक कठोरता का सामना किया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने पीएससी के तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर और टामन सिंह सोनवानी के दो भतीजों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रश्न पत्र लीक कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना हत्या से भी अधिक गंभीर अपराध है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाले बहुचर्चित भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने बड़ी सख्ती दिखाई है। जस्टिस बी.डी. गुरु की अदालत ने परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर और पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के दो भतीजों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
कोर्ट ने दो टूक कहा— “जो प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक करता है, वह लाखों युवाओं के भविष्य की हत्या करता है। यह महज भ्रष्टाचार नहीं, एक गंभीर सामाजिक अपराध है।”
भर्ती प्रक्रिया पर उठे थे गंभीर सवाल
CGPSC 2020 की परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने सबसे पहले सवाल उठाए थे। उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह आरोप लगाया था कि परीक्षा में अफसरों और राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों को मनमाने ढंग से चयनित कर डिप्टी कलेक्टर जैसे पदों पर बैठा दिया गया। हाईकोर्ट ने भी इन आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर एक ही परिवार के कई लोगों का चयन कोई संयोग नहीं हो सकता। अदालत ने परीक्षा की जांच के आदेश दिए, जिसके बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।


ACB से CBI तक पहुंचा मामला
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शुरू की और दो अलग-अलग FIR दर्ज की गईं। बाद में जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के इशारे पर परीक्षा के प्रश्नपत्र उनके भतीजों नितेश सोनवानी और साहिल सोनवानी तक पहुंचाए गए। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने यह प्रश्न पत्र बजरंग पावर एंड इस्पात के निदेशक श्रवण गोयल को दिलवाया, जिन्होंने इसे अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को सौंपा। आरोप है कि इन्हीं प्रश्न पत्रों की मदद से सभी ने प्रशासनिक पदों पर चयन हासिल किया।
जमानत के लिए कोर्ट में दी गई दलीलें
गिरफ्तारी के बाद टामन सिंह सोनवानी और उनके भतीजों ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी। वकीलों ने दावा किया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। यह भी तर्क दिया गया कि PSC नियमों के मुताबिक भतीजा ‘परिवार’ की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए “रिश्तेदारों को लाभ देने” का आरोप निराधार है। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि पीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर ऐसा हमला समाज के भविष्य को अंधकार में ढकेलने जैसा है। ऐसे मामलों में जमानत नहीं दी जा सकती