नगर निगम और TCP के अधिकारियों की मिलीभगत का शक, विभागीय जांच में पुष्टि के बाद अब EOW को सौंपा जा सकता है मामला
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में एक बड़ा नगर नियोजन घोटाला सामने आया है। बीते 10 वर्षों से फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर सैकड़ों नक्शे और ले-आउट पास किए गए। विभागीय जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद अब यह मामला आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के पास जा सकता है। निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर 400 से अधिक नक्शे और 150 से अधिक ले-आउट मंजूर किए गए। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि बीते 10 सालों से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा था और संबंधित अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे रहे।

नगर निगम की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह घोटाला विकास सिंह नामक एक आर्किटेक्ट के नाम पर हुआ, जिसके लाइसेंस क्रमांक 234 पर कार्य किया जा रहा था। इस लाइसेंस से जुड़े मोबाइल नंबर की जब जांच हुई तो वह किसी मयूर गेमनानी के नाम पर निकला।
घोटाले की शुरुआत वर्ष 2015 से मानी जा रही है, जब पहली बार विकास सिंह के नाम पर नक्शे पास होने शुरू हुए। जून 2025 तक यह सिलसिला जारी रहा। दिलचस्प बात यह रही कि 13 मई को नगर निगम ने एक अवैध होटल निर्माण पर कार्रवाई की, जिसकी मंजूरी विकास सिंह द्वारा दी गई थी। कार्रवाई के बाद जब जांच की गई, तो 24 जुलाई को विकास सिंह का लाइसेंस ब्लैक लिस्ट कर दिया गया।
हालांकि बाद में आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने ही स्पष्ट कर दिया कि “विकास सिंह” नाम का कोई पंजीकृत आर्किटेक्ट उनके पास नहीं है। यह जानकारी मिलने के बाद नगर निगम ने विस्तृत जांच शुरू की, जिसमें खुलासा हुआ कि विकास सिंह के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध ले-आउट और नक्शे पास कराए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही दिन में 29 फाइलें स्वीकृत की गईं, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका और प्रबल हो गई है। बताया जा रहा है कि ले-आउट और नक्शा पास कराने में 8,000 से 2.5 लाख रुपए तक का खर्च आता है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घोटाला करोड़ों रुपए का हो सकता है।
नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला अब आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) को सौंपा जा सकता है और जल्द ही FIR दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी। कई वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के घेरे में लाया जा रहा है और आगे बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। इस मामले में बिलासपुर नगर निगम आयुक्त अमित कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।