हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव ने चुनाव लड़ने से रोकने वाले नियम को दी थी चुनौती, अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल चुनाव में जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने पर लगाए गए प्रतिबंध को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव की याचिका को खारिज कर दिया। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के बहुप्रतीक्षित चुनाव में जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा। हाईकोर्ट ने मंगलवार को इस नियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अब याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
स्टेट बार काउंसिल चुनाव के लिए 7 अगस्त से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो 14 अगस्त तक चलेगी। प्रदेश के वकील 25 सदस्यों का चुनाव करेंगे, जिसके बाद निर्वाचित सदस्य स्टेट बार के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चयन करेंगे।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में यह अधिसूचना जारी की थी, जिसके तहत पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है ताकि वोटर्स पर संभावित प्रभाव रोका जा सके। इस नियम को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव वरूणेंद्र मिश्रा ने चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह प्रावधान संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, साथ ही 10 साल बाद हो रहे चुनाव के कारण उन्हें इस नए नियम की जानकारी पहले नहीं थी।
चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह निर्णय उनकी स्वतंत्रता और समान अवसर के अधिकार पर आघात है, इसलिए अगला कदम सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना होगा।