ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव और सेंट्रल कमेटी सदस्य था; जनवरी में इसी इलाके में 16 नक्सली मारे गए थे
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना क्षेत्र के मटाल जंगल में गुरुवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। इसमें 10 नक्सली ढेर हो गए। मारे गए नक्सलियों में 1 करोड़ का इनामी मोडेम बालकृष्ण भी शामिल है, जो नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। उसकी मौत की पुष्टि पुलिस ने की है।
रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि एसटीएफ, कोबरा और राज्य पुलिस बल के जवान नक्सल विरोधी अभियान पर थे। सुबह से कई घंटे तक दोनों ओर से गोलाबारी चली। मुठभेड़ खत्म होने के बाद घटनास्थल पर नक्सलियों के शव पड़े मिले, लेकिन इलाके में आईईडी के खतरे के कारण रात में सर्च अभियान रोकना पड़ा।
चलपती के बाद मिली थी बड़ी जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, 14 जनवरी को चलपती समेत 16 नक्सलियों के मारे जाने के बाद नुआपड़ा-गरियाबंद-धमतरी डिवीजन कमेटी को विस्तार देने की जिम्मेदारी बालकृष्ण को दी गई थी। इसके बाद से वह लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय था। पुलिस को उसकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी, जिसके आधार पर एसपी निखिल राखेचा के नेतृत्व में संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया गया।
सरेंडर नक्सली की सूचना से मिली सफलता
बालकृष्ण पिछले 25 साल से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचा हुआ था। उसके बारे में एजेंसियों के पास सिर्फ जवानी की तस्वीरें थीं। लेकिन करीब 15 दिन पहले उसके गार्ड कैलाश ने सरेंडर किया और पुलिस को कई अहम जानकारियां दीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर सुरक्षाबलों ने बालकृष्ण तक पहुंच बनाई।
बीमारी से जूझ रहा था नक्सली कमांडर
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बालकृष्ण लंबे समय से शुगर की बीमारी से पीड़ित था। उसके सिर के बाल झड़ चुके थे और चलने के लिए दो लाठियों का सहारा लेना पड़ता था। बावजूद इसके वह नक्सल संगठन में अहम भूमिका निभा रहा था।
जनवरी में ढेर हुए थे 16 नक्सली
याद रहे कि इसी साल 14 जनवरी को गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ी घाट इलाके में करीब 80 घंटे तक चले ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें से 12 नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था। उस मुठभेड़ में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य चलपती और डिवीजन प्रमुख सत्यम गावड़े भी मारे गए थे।