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लाइसेंस जारी करने में सख्ती और ओवरस्पीड पर भारी जुर्माना हो
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हर चौराहे पर निगरानी, हाईवे पर कैमरे और चेक पोस्ट जरूरी
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शासन और जनता दोनों की साझा जिम्मेदारी से घटेंगे हादसे
तेज रफ्तार वाहन आज सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं। ओवरस्पीडिंग, लापरवाह ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी ने न केवल हजारों जानें ली हैं बल्कि परिवार भी उजाड़े हैं। पाठकों का मानना है कि हादसों पर अंकुश के लिए सख्त कानून, आधुनिक तकनीक और जन-जागरूकता—तीनों का संगम होना चाहिए।
सड़क पर दौड़ती तेज रफ्तार गाड़ियां हादसों का बड़ा कारण बन रही हैं। आमजन का कहना है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया सख्त होनी चाहिए और स्पीड लिमिट तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए। ओवरस्पीड चालकों पर लाइसेंस निलंबन, वाहन जब्ती और बार-बार गलती करने पर जेल की सजा भी होनी चाहिए।
युवाओं में रफ्तार को शान समझने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना जरूरी है। इसके लिए स्पीड ब्रेकरों और चौराहों पर कैमरे लगाए जाएं तथा शहरों में घुसने वाले भारी वाहनों की एंट्री पर पाबंदी हो।
पाठकों का कहना है कि सड़क हादसों की रोकथाम में तकनीक की बड़ी भूमिका हो सकती है। स्पीड गन, राडार कैमरे और डिजिटल चालान से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है।
सड़कें गड्ढामुक्त हों, संकेतक और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो तथा वाहनों की तकनीकी खामियों पर भी ध्यान दिया जाए।
लोगों का मानना है कि शासन और जनता—दोनों को जिम्मेदारी निभानी होगी। जहां शासन को कठोर दंड और सख्त निगरानी लागू करनी होगी, वहीं जनता को सतर्कता, सजगता और यातायात नियमों को बोझ न समझते हुए पालन करना होगा। तभी सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।