लोन और EMI पर नहीं पड़ेगा असर; महंगाई घटने और जीएसटी कटौती के बाद लिया गया फैसला
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया। यानी उपभोक्ताओं के लिए लोन न तो सस्ते होंगे और न ही महंगे। साथ ही, रिज़र्व बैंक ने देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP ग्रोथ) का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है।
मुंबई (ए)। भारतीय रिज़र्व बैंक ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने इसे 5.5% पर बरकरार रखा है। इसका सीधा मतलब है कि उपभोक्ताओं की EMI फिलहाल जस की तस रहेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 1 अक्टूबर को जानकारी दी कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चली बैठक में सभी सदस्यों ने दरों को स्थिर रखने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जीएसटी कटौती और महंगाई में गिरावट के बाद यह फैसला लिया गया है।
GDP अनुमान 6.8% तक बढ़ा
बैठक में देश की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) का अनुमान 6.5% से संशोधित कर 6.8% कर दिया गया। आरबीआई का मानना है कि मौजूदा आर्थिक संकेतक बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा कर रहे हैं।
इस साल तीन बार हुई दरों में कटौती
गौरतलब है कि चालू वर्ष में फरवरी, अप्रैल और जून की बैठकों में तीन बार ब्याज दर घटाई गई थी। फरवरी में 0.25%, अप्रैल में 0.25% और जून में 0.50% की कटौती की गई। इस तरह अब तक कुल 1% की कमी हो चुकी है।
रेपो रेट क्यों अहम है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। दरें घटने पर बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है और आम उपभोक्ताओं को भी लोन सस्ती दर पर मिलते हैं। जबकि दरें बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं और महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
हर दो महीने में होती है समीक्षा बैठक
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में छह सदस्य होते हैं, जिनमें तीन आरबीआई से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नामित होते हैं। बैठक हर दो महीने में होती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष (2025-26) में कुल छह बैठकें निर्धारित की गई हैं।