किडनी और बच्चेदानी की बीमारी से जूझ रही बाघिन का गुजरात में निधन; मंत्री केदार कश्यप ने जताई संवेदना, कहा– शावकों की होगी विशेष देखभाल
छत्तीसगढ़ की नंदनवन जंगल सफारी की सबसे लोकप्रिय बाघिन ‘बिजली’ अब नहीं रही। आठ वर्ष की आयु में उसने 10 अक्टूबर की सुबह गुजरात के जामनगर स्थित ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में अंतिम सांस ली। बीते कई महीनों से वह किडनी और बच्चेदानी की गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी।
रायपुर। नया रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी की चर्चित बाघिन ‘बिजली’ ने आठ वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। शुक्रवार सुबह 2:30 बजे उसने जामनगर (गुजरात) के ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में अंतिम सांस ली।
वह लंबे समय से किडनी और बच्चेदानी की बीमारी से जूझ रही थी।
वन मंत्री ने जताई संवेदना
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने बाघिन बिजली के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा—
“‘बिजली’ केवल एक बाघिन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की वन्य संपदा की पहचान थी। उसकी जीवंत उपस्थिति ने नंदनवन में आने वाले हर आगंतुक को प्रभावित किया। उसकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।”
मंत्री कश्यप ने बताया कि वन विभाग और चिकित्सकों ने पूरी निष्ठा से उसका उपचार किया, परंतु प्रकृति के आगे सभी प्रयास विफल रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ‘बिजली’ के शावकों की विशेष निगरानी और देखभाल सुनिश्चित की जाए।
गुजरात में दी गई विशेष चिकित्सा सुविधा
मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि बाघिन की स्थिति बिगड़ने पर उसे 7 अक्टूबर को विशेष ट्रेन से जामनगर भेजा गया था ताकि उसे अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा दी जा सके।
जांच में पाया गया कि उसके ब्लड यूरिया नाइट्रोजन, क्रिएटिनिन और पोटेशियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ चुका था। डॉक्टरों की टीम ने उसे गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में रखकर लगातार उपचार किया, लेकिन 10 अक्टूबर की सुबह उसने दम तोड़ दिया।