जगदलपुर के संजय गांधी वार्ड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई; कांग्रेस बोली– बिना नोटिस घर गिराए, 50 से ज्यादा परिवार बेघर; अफसरों ने कहा– नोटिस पहले ही जारी किया गया था
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दिवाली से पहले 32 परिवारों की खुशियों पर बुलडोजर चल गया। रेलवे प्रशासन ने शनिवार को रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में अवैध कब्जे की जमीन पर बने मकानों को ढहा दिया। प्रशासन का दावा है कि यह जमीन रेलवे की है और कब्जाधारियों को पहले नोटिस जारी किया गया था। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें किसी तरह की जानकारी नहीं दी गई। इस कार्रवाई से इलाके में हंगामा मच गया और सियासत भी गर्म हो गई है।
जगदलपुर। दिवाली से ठीक पहले रेलवे प्रशासन ने संजय गांधी वार्ड में बड़ी अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की। शनिवार को सुबह रेलवे और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और करीब 32 घरों पर बुलडोजर चला दिया।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह जमीन रेलवे की संपत्ति है, जिस पर अवैध रूप से मकान बनाए गए थे।
एडीएम नागा पसर ने बताया कि विभाग ने दो महीने पहले ही नोटिस जारी कर दिया था, लेकिन कब्जाधारी मकान खाली नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, “यह भूमि रेलवे कर्मियों के लिए आवश्यक क्षेत्र में आती है। 2 अक्टूबर को कार्रवाई तय थी, पर दशहरा के कारण स्थगित की गई थी। अब आदेश के अनुसार कार्रवाई दोबारा शुरू की गई है।”
स्थानीयों का विरोध, बोले— कोई नोटिस नहीं मिला
रेलवे की कार्रवाई के दौरान इलाके में काफी हंगामा हुआ। स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया कि उन्हें पूर्व में कोई सूचना या नोटिस नहीं दिया गया।
पीड़ितों ने बताया कि जब सभी लोग काम पर गए थे, तभी पुलिस और रेलवे अधिकारी घर गिराने पहुंच गए।
उनका कहना है कि नगर निगम को टैक्स और नल बिल भरने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली। कई परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किए थे, पर अब वे बेघर हो गए हैं।
सियासत भी गरमाई, कांग्रेस ने साधा निशाना
कार्रवाई की खबर मिलते ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य, पार्षद कोमल सेना और पार्टी कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा, “रेलवे प्रशासन ने त्योहार से पहले बिना नोटिस गरीबों के घर उजाड़ दिए। अब ये लोग कहां जाएंगे?”
पार्षद कोमल सेना ने कहा कि वार्ड प्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “अधिकारियों ने कहा था कि सिर्फ दो लाइनें तोड़ी जाएंगी, लेकिन बाद में पूरी बस्ती गिरा दी गई।”
महापौर ने मांगा राहत का समय
नगर निगम के महापौर संजय पांडेय ने कहा कि इस वार्ड में 2022 में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई थी।
उन्होंने बताया कि डीआरएम से बातचीत कर दिवाली तक का समय मांगा गया है, ताकि शेष बचे मकानों को अभी न तोड़ा जाए। महापौर ने कहा कि निगम प्रशासन प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की कोशिश कर रहा है।
प्रशासन की दलील
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उच्चस्तरीय निर्देशों के तहत की गई है। भूमि रेलवे कर्मचारियों के उपयोग के लिए आरक्षित है और पिछले कई वर्षों से यहां अवैध निर्माण बढ़ रहे थे।
स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण
घटना के बाद क्षेत्र में माहौल तनावपूर्ण है। प्रभावित परिवार अस्थायी ठिकानों में शरण लिए हुए हैं। पुलिस बल मौके पर तैनात है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।