25 साल में खनिज राजस्व 34 गुना बढ़ा, जीएसडीपी में 10 प्रतिशत तक पहुँची हिस्सेदारी; विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी कायम
रायपुर। कभी हरियाली, संस्कृति और लोकजीवन के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा के दम पर देश की आर्थिक मानचित्र पर अलग पहचान बना चुका है। राज्य गठन के दो दशक बाद छत्तीसगढ़ ने खनिज क्षेत्र में ऐसी उड़ान भरी है कि अब इसे देश की ‘खनिज राजधानी’ कहा जाने लगा है।
छत्तीसगढ़, जो कभी केवल अपनी हरियाली, जनजातीय संस्कृति और लोकपरंपराओं के लिए जाना जाता था, आज भारत की खनिज राजधानी के रूप में नई पहचान हासिल कर चुका है। राज्य की धरती में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, चूना पत्थर और टिन जैसे अनेक खनिजों के समृद्ध भंडार मौजूद हैं। यही कारण है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिज क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में खनिज क्षेत्र का योगदान अब लगभग 10 प्रतिशत तक पहुँच गया है। राज्य गठन के समय वर्ष 2000 में जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपये हो चुका है — यानी 25 वर्षों में यह 34 गुना की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज कर चुका है।
वन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए विकास की इस दिशा में छत्तीसगढ़ की यह उपलब्धि उल्लेखनीय मानी जा रही है। राज्य सरकार खनिज संपदा के दोहन के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों और पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन का मॉडल तैयार हो रहा है।