चुनाव आयोग 10 से 15 राज्यों में शुरू करेगा स्पेशल इंटेंसिव रिविजन; असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी पर रहेगा खास फोकस
देश में मतदाता सूची को अद्यतन करने की सबसे बड़ी कवायद अगले हफ्ते शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR)’ अभियान की शुरुआत 10 से 15 राज्यों में करेगा। पहले उन राज्यों में प्रक्रिया शुरू होगी, जहां अगले एक साल के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं—जैसे असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी। इस पहल का मकसद मतदाता सूची से दोहराव और फर्जी नामों को हटाकर उसे शुद्ध बनाना है।
नई दिल्ली। चुनाव आयोग देशभर में वोटर लिस्ट को अपडेट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अगले हफ्ते से स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की शुरुआत होगी। यह प्रक्रिया पहले उन राज्यों में शुरू होगी, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन राज्यों में अभी स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं, वहां SIR फिलहाल स्थगित रहेगा। इन राज्यों में कर्मचारियों की तैनाती निकाय चुनावों में होने के कारण वे मतदाता सूची के कार्य में भाग नहीं ले पाएंगे। चुनाव संपन्न होने के बाद वहां यह प्रक्रिया की जाएगी।
राज्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ दो बैठकें हुईं
चुनाव आयोग ने SIR लागू करने से पहले सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के साथ दो दौर की बैठकें कीं। कई राज्यों ने पिछली SIR की मतदाता सूचियां अपनी वेबसाइटों पर अपलोड भी कर दी हैं। उदाहरण के तौर पर, दिल्ली की वेबसाइट पर 2008 की वोटर लिस्ट उपलब्ध है, जबकि उत्तराखंड की अंतिम SIR 2006 में हुई थी। बिहार में हाल ही में मतदाता सत्यापन प्रक्रिया पूरी की गई और अंतिम डेटा 1 अक्टूबर को जारी हुआ।
SIR का उद्देश्य: विदेशी नागरिकों और फर्जी वोटरों की पहचान
आयोग के अनुसार SIR न केवल मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए है, बल्कि इसका एक बड़ा उद्देश्य विदेशी या अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाना भी है। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार सीमा से लगे राज्यों में बढ़ते अवैध प्रवास के मद्देनजर अहम माना जा रहा है।
अधिकांश राज्यों में पिछली बार SIR 2002 से 2004 के बीच हुई थी। इस बार इसे व्यापक और तकनीकी तौर पर उन्नत रूप में किया जाएगा।
देश में 99 करोड़ मतदाता, 21 करोड़ को देने होंगे दस्तावेज
इस प्रक्रिया में देशभर के 99.10 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया जाएगा। चुनाव आयोग ने तय किया है कि 31 दिसंबर 2025 तक 18 वर्ष पूरे करने वाले नागरिक भी इस सूची में शामिल होंगे। बिहार के 8 करोड़ मतदाताओं की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अनुमान है कि केवल 21 करोड़ मतदाताओं को ही दस्तावेज सत्यापन के लिए देना होगा।
आंध्र प्रदेश में 2003 में 5.5 करोड़ मतदाता थे, जो अब 6.6 करोड़ हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यह संख्या 11.5 करोड़ से बढ़कर 15.9 करोड़ हो गई है, जबकि दिल्ली में 2008 के 1.1 करोड़ से अब 1.5 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। यह बढ़ोतरी शहरीकरण और माइग्रेशन के कारण हुई है।
बीएलओ जाएंगे हर घर, प्री-फिल्ड फॉर्म देंगे
बैठक में तय हुआ है कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हर मतदाता के घर जाएंगे और उन्हें प्री-फिल्ड फॉर्म सौंपेंगे। यह प्रक्रिया मतदाता सत्यापन को सरल बनाने और गलत प्रविष्टियों को खत्म करने के उद्देश्य से होगी।
बिहार में SIR को लेकर हुआ था विवाद
बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक विवाद भी हुआ था। विपक्ष ने सरकार पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही ठहराया। बिहार की अंतिम वोटर लिस्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की जा चुकी है।