लोको पायलट ने 76 किमी की रफ्तार से पैसेंजर ट्रेन चलाई; सिग्नल भ्रम और अनुभव की कमी हादसे की वजह
गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू ट्रेन हादसे में पुलिस ने ट्रेन ड्राइवर के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि ट्रेन ने रेड सिग्नल पार करते हुए 76 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी से टक्कर मारी थी। हादसे में 11 लोगों की मौत और 25 से अधिक घायल हुए।
बिलासपुर। गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू ट्रेन हादसे की शुरुआती जांच में पता चला है कि ट्रेन ने अनुमत गति से तेज़ रफ्तार में चलकर सामने आ रही मालगाड़ी को टक्कर दी। घटना स्थल पर कर्व और सिग्नल भ्रम की वजह से ट्रेन नियंत्रित नहीं हो सकी।
अनुभव और प्रमोशन का असर
प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि लोको पायलट विद्या सागर को हाल ही में पैसेंजर ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वे मालगाड़ी चलाते थे। अनुभव की कमी और नए सिग्नल सिस्टम की जटिलता हादसे में एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD)
जांच में यह भी सामने आया कि ट्रेन ने रेड सिग्नल पार किया। इसे रेलवे तकनीकी भाषा में SPAD कहा जाता है। इस घटना में लोको पायलट और सहायक लोको पायलट को ट्रेन समय पर नियंत्रित न कर पाने का जिम्मेदार माना गया है।
हालांकि, लोको पायलट विद्या सागर की मौत हो चुकी है। महिला सहायक लोको पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।
एफआईआर और आगे की जांच
पुलिस ने स्टेशन अधीक्षक के मेमो पर ट्रेन ड्राइवर के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। एफआईआर में केवल “ट्रेन ड्राइवर” शब्द का उल्लेख है। जांच अधिकारी बता रहे हैं कि पूरी जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
सीआरएस का निरीक्षण
दुर्घटना के अगले दिन रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने घटनास्थल का 40 मिनट तक निरीक्षण किया। इसके बाद दुर्घटनाग्रस्त कोचों का मुआयना किया और 19 अधिकारियों को दस्तावेजों के साथ तलब किया गया।