CGST ने 15 कंपनियों पर कसा शिकंजा; बोगस इनवॉयस, फर्जी ट्रांसपोर्टर और टैक्स चोरी के सबूत मिले—स्टेट जीएसटी भी किराना व्यापारियों पर रखेगा कड़ी नजर
रायपुर और आसपास के जिलों में फर्जी बिलिंग का बड़ा रैकेट पकड़ा गया है। सेंट्रल जीएसटी की जांच में कई कंपनियों द्वारा मोपेड और स्कूटर जैसे वाहनों के नंबर पर 15 से 30 मीट्रिक टन माल की सप्लाई दिखाकर करोड़ों रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने का मामला सामने आया है। विभाग ने 15 कंपनियों को 150 करोड़ रुपए की रिकवरी नोटिस जारी किया है।
रायपुर। सेंट्रल जीएसटी विभाग ने छत्तीसगढ़ में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी का बड़ा नेटवर्क उजागर किया है। जांच में पता चला है कि कई कंपनियां पिछले तीन साल से बोगस बिल जारी कर करोड़ों रुपए का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ले रही थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन वाहनों से 15 से 30 मीट्रिक टन माल की सप्लाई दिखायी गई, वे असल में स्कूटर, मोपेड, मोटरसाइकिल और ऑटो निकले।
विभाग ने फिलहाल 15 कंपनियों को 150 करोड़ रुपए की वसूली के लिए डिमांड नोटिस जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी है कि समय पर पेनाल्टी नहीं चुकाने पर इन कंपनियों का जीएसटी लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। रायपुर की तीन एजेंसियों को विशेष रूप से नोटिस जारी कर बताया गया है कि उन्होंने किस तरह फर्जी इनवॉयसिंग कर टैक्स चोरी को अंजाम दिया।
बलौदाबाजार, बेमेतरा, कवर्धा और बिलासपुर में सीमेंट सप्लाई करने वाली एजेंसियों पर भी 2–3 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई गई है।
वाहन नंबर की जांच में खुली पोल
जांच में सामने आया कि इन एजेंसियों ने जिन वाहन नंबरों से माल ढुलाई दिखायी:
- वही वाहन स्कूटर या मोटरसाइकिल थे
- कुछ नंबर ऑटो रिक्शा के थे
- फिर भी रिकार्ड में हर दिन 15-30 MT माल ढुलाई दर्ज की गई
- विभाग का कहना है कि यह सुनियोजित तरीके से टैक्स चोरी करने का बड़ा नेटवर्क है।
स्टेट जीएसटी का भी एक्शन—किराना व्यापारियों पर निगाह
दूसरी तरफ स्टेट जीएसटी विभाग भी सक्रिय हो गया है। अधिकारियों को शिकायत मिली है कि कई बड़े कारोबारी जीएसटी की दरें कम होने के बावजूद सामान पुराने रेट पर दुकानदारों को दे रहे हैं। इससे खुदरा दुकानदार भी उपभोक्ताओं से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं।
इस पर विभाग ने टीम गठित कर जांच तेज कर दी है और चेतावनी दी है कि गड़बड़ी पकड़े जाने पर सीधी एफआईआर की जाएगी।
ट्रांसपोर्टरों पर भी जांच—5000 से 10,000 तक वसूली की शिकायत
CGST को यह शिकायत भी मिली है कि कुछ ट्रांसपोर्टर सप्लायरों को छापा पड़ने का डर दिखाकर उनसे 5 हजार से 10 हजार रुपए तक वसूली कर रहे हैं। दावा किया जाता है कि उनके पैसे देने पर रास्ते में कोई जांच नहीं होगी।
इस पर विभाग ने:
बड़े ट्रांसपोर्टरों के रिटर्न की जांच शुरू की है
रास्ते में गाड़ियों को रोककर वजन, स्टॉक और ई-वे बिल की चेकिंग बढ़ा दी है
कई जगहों पर कार्रवाई का विरोध भी हुआ, लेकिन विभाग का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।