मैनपाट में घास पर जमी बर्फ, बलौदाबाजार-पेंड्रा में अलाव से राहत; मौसम विभाग ने अगले तीन दिन तक ठंड बढ़ने की दी चेतावनी
छत्तीसगढ़ में सर्दी ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तरी और मध्य हिस्सों में अगले तीन दिन तक शीतलहर चलने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में पारा लुढ़कने से सुबह की ओस की बूंदें बर्फ में बदल रही हैं, जबकि मैदानी इलाकों में लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि ठंड में अभी और इजाफा हो सकता है।
रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। बुधवार को प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अंबिकापुर का पारा 7.6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया, जबकि रायपुर में नवंबर माह का तापमान नौ साल बाद 13°C तक पहुंचा है।
मैनपाट में ठंड इतनी बढ़ गई है कि घास पर जमी ओस की बूंदें अब बर्फ का रूप लेने लगी हैं। बलौदाबाजार, पेंड्रा और अंबिकापुर जैसे इलाकों में लोग सुबह-शाम अलाव के सहारे ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, कई सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
मैदानी इलाकों में दुर्ग फिलहाल सबसे ठंडा शहर बना हुआ है, जहां रात का तापमान 9.6°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से 8 डिग्री कम है।
पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान जगदलपुर में 30.7°C और सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 7.6°C रहा।
पुराने रिकॉर्ड भी बने चर्चा का विषय
मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि नवंबर माह ने कई बार छत्तीसगढ़ के तापमान का चरम रूप देखा है। 2 नवंबर 1935 को अब तक का सबसे गर्म नवंबर दर्ज हुआ था, जब अधिकतम तापमान 35.6°C पहुंच गया था। वहीं 22 नवंबर 1883 की रात अब तक की सबसे ठंडी नवंबर रात रही, जब पारा 8.3°C तक गिर गया था।