व्यापारियों ने नोटिस न मिलने का लगाया आरोप, कांग्रेस ने आंदोलन को दिया समर्थन; नालंदा-2 निर्माण और रेलवे दावे से बढ़ा विवाद
राजधानी रायपुर में एनआईटी चौपाटी को आज आमानाका स्थानांतरित किया जाना है, लेकिन शिफ्टिंग से पहले ही विवाद गहरा गया है। व्यापारी, कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय गुरुवार रात 11 बजे से धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि बिना पूर्व सूचना और संवाद के दुकानों को हटाया जा रहा है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होगा।
रायपुर। राजधानी में स्थित एनआईटी चौपाटी को आज आमानाका शिफ्ट किए जाने की तैयारी के साथ ही विवाद भी उभर आया है। शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले गुरुवार देर रात 11 बजे से व्यापारी धरने पर बैठ गए। इस विरोध में कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित कई नेता भी शामिल हो गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम ने बिना पूर्व नोटिस और बिना विकल्प दिए दुकानों को हटाने का निर्णय लिया, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
बुधवार को नगर निगम की टीम चौपाटी पहुंची और शिफ्टिंग की जानकारी दी, जिसके बाद मौके पर ही व्यापारियों ने कड़ा विरोध जताया। उनका आरोप है कि प्रशासन ने न तो संवाद किया और न ही नई जगह पर उचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कांग्रेस ने इस आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए इसे व्यापारियों के हितों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
गौरतलब है कि लगभग 10 करोड़ रुपए खर्च कर तैयार की गई चौपाटी को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक विवाद रहा है। पूर्व विधायक राजेश मूणत ने इस परियोजना का विरोध किया था। 2023 में भाजपा सरकार आने के बाद चौपाटी हटाकर उस स्थान पर नालंदा-2 विकसित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हुआ।
इसी बीच रेलवे ने जमीन पर अपना दावा ठोकते हुए 32 दुकानदारों को नोटिस भेज दिया, जिससे मामला और उलझ गया। अब नगर निगम और रेलवे प्रशासन के बीच बातचीत का दौर जारी है, ताकि विवाद का समाधान निकाला जा सके और आगामी कार्यवाही को अंतिम रूप दिया जा सके।