छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी और निर्माण दोष मानते हुए 45 दिन में कार दुरुस्त करने या नई कार देने का आदेश पारित किया।
छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसले में मर्सिडीज बेंज इंडिया और रायपुर स्थित डीलर गणनायक कार्स को खरीदार को 1.15 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने या नई कार देने का आदेश दिया है। यह आदेश कार में गंभीर निर्माण दोष पाए जाने पर दिया गया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मर्सिडीज बेंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे और उसके रायपुर स्थित डीलर गणनायक कार्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बड़ा आदेश पारित किया है। आयोग ने दोनों कंपनियों को निर्देशित किया है कि वे बिलासपुर स्थित रामा मोटोकॉर्प के मालिक नितिन अग्रवाल को या तो उसी मॉडल की नई कार दें या फिर 1,15,00,000 रुपये की पूरी राशि ब्याज सहित वापस लौटाएं।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गौतम चौरडिया ने 14 नवंबर 2025 को यह आदेश जारी किया। निर्णय में कार निर्माता और डीलर को सेवा में कमी तथा कार में गंभीर उत्पादन दोष के लिए जिम्मेदार माना गया है।
नितिन अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता हर्ष गुप्ता और हर्षिता गुप्ता के माध्यम से 29 अप्रैल 2024 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 47 के तहत शिकायत दायर की थी। उनका आरोप था कि निर्धारित समय पर नियमित सर्विसिंग और अतिरिक्त खर्च करने के बावजूद कार में लगातार खामियां सामने आती रहीं, लेकिन न तो कंपनी और न ही डीलर ने समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
शिकायत की सुनवाई के दौरान स्वतंत्र ऑटो टेक्निकल विशेषज्ञ सचिन मुलगे की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें कार के निर्माण में गंभीर तकनीकी दोष पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने निर्माता और डीलर दोनों को दोषी ठहराया।
आयोग ने आदेश दिया है कि 45 दिनों के भीतर कार को खरीदार की संतुष्टि तक ठीक किया जाए। अगर कंपनियां इसमें विफल रहती हैं, तो 30 दिनों के भीतर उसी मेक और मॉडल की नई कार देने या फिर नई कार की कीमत मय ब्याज लौटाने की बाध्यता होगी।
इसके साथ ही आयोग ने अतिरिक्त मरम्मत पर लगे 3,10,000 रुपये पर 6 प्रतिशत ब्याज, विशेषज्ञ की रिपोर्ट का शुल्क 54,122 रुपये, मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के लिए 50,000 रुपये तथा मुकदमे का खर्च 15,000 रुपये भी भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो महंगी कारों में खामियों के बावजूद कंपनियों की लापरवाही का सामना करते हैं।