भारतीय टीम कई सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में बेहतर शुरुआत की तलाश में, रोहित शर्मा की फिटनेस पर सभी की निगाहें
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में मिली निराशा को पीछे छोड़ते हुए टीम इंडिया आज रांची में वनडे मुकाबले के साथ नई शुरुआत करने उतरेगी। केएल राहुल की अगुआई वाली भारतीय टीम सीरीज में बढ़त हासिल करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, जबकि क्विंटन डिकॉक की टीम मेजबानों को कड़ी चुनौती देने तैयार है।
रांची। दक्षिण अफ्रीका से दो टेस्ट मैचों की क्लीन स्वीप के बाद भारतीय टीम अब वनडे प्रारूप में अपनी खोई लय वापस पाने की कोशिश करेगी। रविवार को रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीन मुकाबलों की वनडे सीरीज का पहला मैच खेला जाएगा, जिसकी शुरुआत दोपहर 1:30 बजे होगी।
सीरीज का दूसरा मुकाबला 3 दिसंबर को रायपुर और तीसरा व अंतिम मैच 6 दिसंबर को विशाखापत्तनम में आयोजित किया जाएगा। भारत की कोशिश होगी कि वह रांची में जीत के साथ 1-0 की बढ़त बनाकर मेहमान टीम पर दबाव बनाए।
वनडे इतिहास की बात करें तो भारत का दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रिकॉर्ड बहुत मजबूत नहीं रहा है। अब तक दोनों टीमों ने 94 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से दक्षिण अफ्रीका ने 51 मैच जीते, जबकि भारत को 40 मैचों में जीत मिली है। तीन मुकाबले बेनतीजा रहे हैं।
इस बार भारत को नियमित कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर की चोटों के कारण बाहर रहना पड़ रहा है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज को भी आराम दिया गया है। ऐसे में टीम संयोजन को लेकर कई सवाल बने हुए हैं—क्या वाशिंगटन सुंदर को ऑलराउंडर की खास भूमिका मिलेगी या नीतीश कुमार रेड्डी को मौका दिया जाएगा? साथ ही, अगर केएल राहुल विकेटकीपिंग करते हैं, तो ऋषभ पंत की प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर भी असमंजस है। गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और कुलदीप यादव पर जिम्मेदारी होगी।
भारतीय टीम ने मैच से पहले जमकर अभ्यास किया, जिसमें रोहित शर्मा की दमदार बल्लेबाजी सभी का ध्यान खींचती रही। वनडे विश्व कप 2027 की तैयारियों के मद्देनजर उनकी फिटनेस और प्रदर्शन इस सीरीज में खास मायने रखते हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2013 में इसी रांची मैदान पर रोहित शर्मा ने पहली बार ओपनर के रूप में खेलकर अपने करियर को नई दिशा दी थी। अब एक दशक बाद फिर यही मैदान उन्हें नया मोड़ देने की क्षमता रखता है।
भारत को अगले दो महीनों में सिर्फ छह वनडे मिलने हैं। इसलिए यह सीमित मौके कई खिलाड़ियों, खासकर अनुभवी सितारों के लिए चयन का अहम टेस्ट साबित हो सकते हैं।