- दुर्ग में शीतलहर, रात का तापमान 9.2°C
- जगदलपुर–चित्रकोट मार्ग पर घना कोहरा
- सरगुजा संभाग में सबसे ज्यादा ठिठुरन
उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं ने छत्तीसगढ़ में ठंड का असर और तेज कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान तेजी से गिर रहा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की संभावना जताई है, जिससे ठंड और बढ़ने के आसार हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। उत्तर से आ रही सर्द हवाओं के चलते दुर्ग में शीतलहर का असर बना हुआ है, जहां रात का तापमान गिरकर 9.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अंबिकापुर, पेंड्रा और रायगढ़ जैसे इलाकों में भी सुबह और शाम ठिठुरन बढ़ गई है। लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
शुक्रवार सुबह तक जगदलपुर–चित्रकोट मार्ग पर घना कोहरा छाया रहा, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। सरगुजा संभाग में भी ठंड का असर ज्यादा देखा जा रहा है। दो दिन पहले अंबिकापुर–बनारस मार्ग पर भी घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम हो गई थी।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक और गिर सकता है। कुछ इलाकों में शीतलहर और कोहरे की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, मौसम में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। बीते 24 घंटे में प्रदेश का अधिकतम तापमान दुर्ग में 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 5.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
बच्चों की सेहत पर असर
ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। पिछले एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में तेजी से ठंडा होता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड को सहन नहीं कर पाते। सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में इसका खतरा और बढ़ जाता है।
NICU तक पहुंच रहे मामले
डॉक्टरों का कहना है कि लापरवाही बरतने पर नवजातों को NICU और SNCU में भर्ती करना पड़ रहा है। शरीर का तापमान अचानक सामान्य से नीचे चला जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।
OPD में बढ़ी मरीजों की भीड़
ठंड के कारण अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
क्या है हाइपोथर्मिया?
हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 98.6 फॉरेनहाइट (37°C) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने से शरीर के महत्वपूर्ण अंग सही तरीके से काम करना बंद कर सकते हैं।
पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडे पानी में रहने पर शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।