छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा मेडिकल रेस्क्यू: 50% उम्मीद के बावजूद डॉक्टरों ने नहीं मानी हार, फटी हुई ‘कैरोटिड आर्टरी’ को जोड़कर बचाई जान
रायपुर (ए) : राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। एक सामान्य सा दुकानदार, जो रोज की तरह अपने घर में ब्रश कर रहा था, अचानक जीवन और मृत्यु के बीच की जंग में फंस गया। उसकी गर्दन की वो नस, जो सीधे दिमाग को खून सप्लाई करती है, बिना किसी बाहरी चोट के अचानक फट गई। मेडिकल की दुनिया में इसे ‘स्पोंटेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर’ (SCAR) कहा जाता है, जिसके अब तक के इतिहास में बेहद गिने-चुने मामले ही दर्ज हैं। रायपुर के डॉक्टरों ने इस अत्यंत दुर्लभ मामले में वो करिश्मा कर दिखाया, जिसने चिकित्सा विज्ञान की ताकत साबित कर दी है।
अचानक हुई घटना और अस्पताल में मची खलबली
मरीज के साथ यह हादसा उस वक्त हुआ जब वह सुबह तैयार हो रहा था। अचानक गर्दन में तेज धमाके जैसा दर्द हुआ और देखते ही देखते उसकी गर्दन सूजकर भारी हो गई। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने जब CT एंजियोग्राफी की, तो मंजर खौफनाक था। दिमाग तक ऑक्सीजन पहुँचाने वाली सबसे मुख्य नली (कैरोटिड आर्टरी) फट चुकी थी और वहां खून का एक बड़ा गुब्बारा बन गया था। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज की जान पर भारी संकट था और वह कभी भी लकवे का शिकार हो सकता था। डॉ. कृष्णकांत साहू की अगुवाई में टीम ने तुरंत ऑपरेशन का फैसला लिया, जबकि इस जटिल स्थिति में सफलता की संभावना बहुत कम थी।

सर्जरी के दौरान थमी रहीं डॉक्टरों की सांसें
ऑपरेशन थिएटर के अंदर का माहौल बेहद तनावपूर्ण था क्योंकि गर्दन के भीतर भारी मात्रा में खून जमा होने की वजह से फटी हुई नस को ढूंढ पाना लगभग नामुमकिन लग रहा था। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अगर एक मिलीमीटर की भी चूक हुई, तो मरीज को ब्रेन डेथ या भारी नुकसान हो सकता था। इस पेचीदा सर्जरी को अंजाम देने के लिए डॉक्टरों ने एक विशेष ‘बोवाइन पेरिकार्डियम पैच’ का इस्तेमाल किया और फटी हुई आर्टरी की बेहद सावधानी से मरम्मत की। घंटों चली इस कठिन प्रक्रिया के बाद जब मरीज को होश आया, तो डॉक्टरों ने चैन की सांस ली क्योंकि वह पूरी तरह सुरक्षित था और उसे कोई न्यूरोलॉजिकल नुकसान नहीं हुआ था।

दुनिया का दुर्लभतम मामला और छत्तीसगढ़ का गौरव
यह मामला इसलिए भी सबसे अलग है क्योंकि आमतौर पर ऐसी नसें किसी गंभीर एक्सीडेंट, इन्फेक्शन या कैंसर की वजह से फटती हैं, लेकिन इस मरीज के साथ यह घटना अचानक और बिना किसी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री के हुई। मेडिकल जगत के इतिहास में रायपुर का डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल अब उन चुनिंदा केंद्रों में शामिल हो गया है जहां इस अत्यंत जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। डॉ. साहू के साथ डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप और उनकी पूरी जांबाज टीम ने अपनी विशेषज्ञता से इस कठिन मिशन को मुमकिन बना दिया है, जिससे छत्तीसगढ़ का नाम चिकित्सा के क्षेत्र में देशभर में ऊंचा हुआ है।