भूपेश बघेल का बड़ा आरोप- “धान खरीदने से बच रही है सरकार”, समितियों में तालाबंदी की चेतावनी
रायपुर (ए) : छत्तीसगढ़ से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ धान खरीदी की अंतिम तारीख से पहले ही प्रदेश की मंडियों और समितियों में सन्नाटा पसरने लगा है। रायपुर समेत कई जिलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन कटना पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अव्यवस्था को लेकर सीधे भाजपा सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि सरकार की मंशा किसानों का धान खरीदने की नहीं है। 31 जनवरी की डेडलाइन अभी दूर है, लेकिन टोकन सिस्टम ठप होने से खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर गई है।
सत्यापन के नाम पर खरीदी प्रक्रिया हुई ठप
समितियों में धान लेकर पहुँच रहे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है क्योंकि प्रभारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि नोडल अधिकारियों के भौतिक सत्यापन के बिना अब एक भी नया टोकन जारी नहीं किया जाएगा। इस नए फरमान ने खरीदी केंद्रों पर काम पूरी तरह ठप कर दिया है। समितियों ने जिला प्रशासन और मार्कफेड से खरीदी की लिमिट बढ़ाने की गुहार लगाई है, लेकिन सरकारी दफ्तरों से अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है, जिससे मैदानी स्तर पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
रायपुर की समितियों में कोटे की किल्लत
राजधानी रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं जहाँ कुकेरा, सिलयारी, धरसीवा और सांकरा जैसी महत्वपूर्ण समितियों में 31 जनवरी तक के कोटे के टोकन पहले ही खत्म हो चुके हैं। अकेले सिलयारी समिति में ही करीब 20 फीसदी ऐसे किसान बचे हैं जो अब तक अपना एक दाना धान भी नहीं बेच पाए हैं। किसानों का आरोप है कि जब समय सीमा समाप्त नहीं हुई है, तो टोकन की बुकिंग रोकना उनके आर्थिक अधिकारों का हनन है।

आंदोलन की राह पर किसान और विपक्षी दल
व्यवस्था से नाराज किसानों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सारागांव समेत कई इलाकों में नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है। कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में किसानों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि सोमवार तक टोकन व्यवस्था दोबारा शुरू नहीं की गई, तो समितियों में तालाबंदी कर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों की इस चेतावनी के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।