लगातार छठे दिन निवेशकों के डूबे खरबों रुपये; ट्रंप की धमकियों और वैश्विक युद्ध के खतरों ने दलाली स्ट्रीट में फैलाया सन्नाटा
मुंबई (ए) : दलाली स्ट्रीट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है, जहाँ हफ्ते के पहले ही दिन निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का ऐसा तूफान आया है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा। आज सोमवार को जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढहते नजर आए। सेंसेक्स 250 अंकों से ज्यादा फिसलकर 83,433 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी बैंक में भी भारी बिकवाली का माहौल है। लगातार छठे दिन बाजार में मची इस तबाही ने ट्रेडर्स की नींद उड़ा दी है और हर तरफ लाल निशान का कब्जा नजर आ रहा है।
दुनियाभर में मचे घमासान से भारतीय बाजार लहूलुहान
बाजार में आई इस सुनामी के पीछे दुनिया के अलग-अलग कोनों में मच रहा कोहराम सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है। अमेरिका और भारत के बीच होने वाली ट्रेड डील को लेकर जो सस्पेंस बना हुआ है, उसने निवेशकों के पसीने छुड़ा दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की अजीबोगरीब बयानबाजी ने जलती आग में घी डालने का काम किया है। इतना ही नहीं, ईरान में गहराता संकट, वेनेजुएला में मची उथल-पुथल और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की ओर से मिल रही धमकियों ने ग्लोबल मार्केट का सेंटीमेंट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। इंडिया VIX के बढ़ते आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी बड़ा भूकंप आ सकता है।
ट्रंप टैरिफ का खौफ और बड़ी कंपनियों के नतीजों का डर
बाजार के लड़खड़ाने की एक और सनसनीखेज वजह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से आने वाला वह फैसला है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। ट्रंप टैरिफ पर आने वाले फैसले में हो रही देरी ने अनिश्चितता का ऐसा माहौल बना दिया है कि कोई भी नया निवेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। घरेलू मोर्चे पर भी खतरे की घंटी बज रही है क्योंकि दिग्गज कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे आने वाले हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और बैंकिंग सेक्टर की मैनेजमेंट कमेंट्री को लेकर निवेशकों में भारी घबराहट है। शॉर्ट टर्म में बाजार की चाल क्या होगी, यह अब पूरी तरह इन बड़ी कंपनियों की परफॉर्मेंस और विदेशी फैसलों पर निर्भर हो गया है।
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अमेरिकी बाजारों की रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार भी भारत में फेल
हैरानी की बात यह है कि जहाँ अमेरिकी बाजार शुक्रवार को ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना रहे थे, वहीं भारतीय बाजार में मातम पसरा हुआ है। डॉव जोन्स और नैस्डेक जैसे इंडेक्स अब तक के सबसे ऊंचे शिखर पर पहुंच चुके हैं और एशियाई बाजारों से भी अच्छे संकेत मिल रहे हैं, लेकिन भारत में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। स्थानीय निवेशक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) इस समय भारतीय मार्केट से पैसा निकालने में लगे हैं। वैश्विक बाजारों की चमक भी भारतीय सेंसेक्स की गिरावट को थामने में नाकाम साबित हो रही है, जिससे यह साफ है कि घरेलू और जियोपॉलिटिकल चुनौतियां फिलहाल बाजार पर हावी हैं।
कच्चे तेल की आग और डॉलर की चाल ने बढ़ाई टेंशन
शेयर बाजार में गिरावट के बीच कच्चे तेल की कीमतों ने भी सरकार और निवेशकों की टेंशन बढ़ा दी है। ईरान में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों और सप्लाई रुकने की आशंका से क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने को बेताब हैं। ब्रेंट क्रूड 63 डॉलर के पार निकल गया है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले रुपया भी लगातार संघर्ष कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में हो रही हलचल और विदेशी करेंसी बास्केट में आ रहे उतार-चढ़ाव ने भारतीय मार्केट की लिक्विडिटी को निचोड़ कर रख दिया है। जानकारों का मानना है कि जब तक युद्ध जैसे हालात और ट्रेड डील पर स्थिति साफ नहीं होती, बाजार में रिकवरी की उम्मीद करना बेमानी होगा।