सामान्य जमीन पर तरबूज, ड्रिप-मल्चिंग और पॉलीहाउस तकनीक से 15 लाख तक पहुंची सालाना आय
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य क्षेत्र के छोटे से गांव रामटेक में 19 वर्षीय किसान अनिल पटेल ने खेती की पारंपरिक धारा बदल दी है। जहां आसपास के किसान धान पर निर्भर हैं, वहीं अनिल ने सब्जी आधारित आधुनिक खेती मॉडल अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया बल्कि तीन साल में अपनी आय 15 लाख रुपए तक पहुंचा दी।
रायपुर (ए)। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य अंतर्गत ग्राम रामटेक के युवा किसान अनिल पटेल ने कम उम्र में ही खेती को नए नजरिए से परिभाषित किया है। पारंपरिक धान की खेती से अलग हटकर उन्होंने सब्जी आधारित उन्नत मॉडल विकसित किया है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
अनिल ने तीन वर्ष पहले महज एक एकड़ भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रयोग की शुरुआत की थी। सफलता मिलने के बाद उन्होंने अदरक, बैंगन, मिर्च और खीरे जैसी नगदी फसलों को शामिल किया। आज स्थिति यह है कि उनकी सालाना आय बढ़कर लगभग 15 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है।
लगातार सफल प्रयोगों के बाद उन्होंने सब्जियों का रकबा बढ़ाकर पांच एकड़ कर दिया है। इसमें तीन एकड़ में ड्रिप-मल्चिंग तकनीक से मिर्च, एक एकड़ में खीरा और एक एकड़ में तरबूज की खेती की जा रही है। इसके अलावा एक एकड़ में पॉलीहाउस स्थापित कर संरक्षित खेती भी की जा रही है। वर्तमान सीजन में अब तक 180 क्विंटल मिर्च की बिक्री हो चुकी है।
विशेष बात यह है कि आमतौर पर रेतीली मिट्टी में उगाई जाने वाली तरबूज की फसल को अनिल ने सामान्य कृषि भूमि में ड्रिप-मल्चिंग पद्धति से सफलतापूर्वक तैयार किया है। एक एकड़ में करीब 30 टन उत्पादन का अनुमान है।
अभयारण्य क्षेत्र में स्थित गांव चारों ओर से जंगलों से घिरा है, जिससे प्राकृतिक नमी बनी रहती है। लगभग 70 फीट के जलस्तर और 25 डिसमिल में निर्मित खेत तालाब के कारण वर्षभर सिंचाई संभव हो पाती है। ड्रिप प्रणाली के माध्यम से पानी और घुलनशील खाद सीधे जड़ों तक पहुंचती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। खेती के साथ उन्होंने तालाब में मत्स्य पालन भी किया, जिससे एक वर्ष में 40 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित हुई। खेती के विस्तार के साथ अब प्रतिदिन लगभग 10 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
अनिल की उपज पश्चिम बंगाल के कोलकाता, सिलीगुड़ी और हावड़ा तथा ओडिशा के कटक और भुवनेश्वर तक सप्लाई हो रही है। व्यापारी सीधे खेत पर पहुंचकर तौल के बाद माल उठाते हैं, जिससे बाजार की अनिश्चितता भी कम हुई है।
अनिल का मानना है कि खेती में बदलाव और तकनीक का समावेश ही भविष्य है। मेहनत भले अधिक हो, लेकिन आधुनिक तकनीक और सही बाजार रणनीति से आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकती है।