हाईटेक टूल्स से मिनटों में पकड़ में आ रहे बोगस बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले; छोटे राज्यों में घटते कलेक्शन पर केंद्र सख्त
राज्य में जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने और कर चोरी पर रोक लगाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सिस्टम से रिटर्न की जांच की जा रही है। अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के जरिए रिटर्न, बिल और कंपनियों के डेटा का मिलान कुछ ही मिनटों में किया जा रहा है, जिससे फर्जीवाड़े का तेजी से खुलासा हो रहा है।
रायपुर। प्रदेश में जीएसटी वसूली को सुदृढ़ करने के लिए कर विभाग ने तकनीक का सहारा लिया है। अब सभी जीएसटी रिटर्न की जांच एआई आधारित टूल्स से की जा रही है। इन सॉफ्टवेयर की मदद से समान प्रकृति के रिटर्न, संदिग्ध बिलिंग, फर्जी कंपनियों और आंकड़ों में गड़बड़ी का विश्लेषण कुछ ही मिनटों में संभव हो रहा है।
तकनीकी निगरानी बढ़ने के बाद फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों में तेजी से कार्रवाई हो रही है। राज्यभर में संदिग्ध कारोबारियों पर छापों की संख्या बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, एआई सिस्टम एक क्लिक में यह जानकारी उपलब्ध करा देता है कि किस फर्म ने कब, कितना और किस प्रकार का रिटर्न दाखिल किया है। डेटा में मामूली विसंगति भी तुरंत चिन्हित हो जाती है।
जानकारी के अनुसार, छोटे राज्यों में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान टैक्स कलेक्शन की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी पाई गई है। केंद्र सरकार ने मॉनिटरिंग बढ़ाते हुए राज्यों को हाईटेक तरीकों के उपयोग के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ समेत लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे राज्यों में 20 प्रतिशत से कम वृद्धि दर का उल्लेख किया गया है, जिसके चलते कलेक्शन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में जीएसटी और वैट से राज्य को 23,448 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे, जो कुल कर राजस्व का 38 प्रतिशत था। उस अवधि में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई थी, जो देश में सबसे अधिक रही। अप्रैल 2025 में 4,135 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड संग्रह भी हुआ था। हालांकि इस बार वृद्धि दर में कमी की आशंका जताई जा रही है।
राज्य के सभी 33 जिलों में जीएसटी कार्यालय सक्रिय हैं। विभाग का दावा है कि ऑनलाइन प्रणाली और तकनीकी विश्लेषण से न केवल कर चोरी पर अंकुश लगेगा, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट भी इन एआई टूल्स का उपयोग कर रिटर्न की शुद्धता सुनिश्चित कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अब कर चोरी छिपाना आसान नहीं है। तकनीक के सहारे विभाग न केवल राजस्व बढ़ाने बल्कि कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।