शो-रूम कीमत के आधार पर हो रही वसूली से खरीदार परेशान; नाम ट्रांसफर महंगा पड़ रहा था सौदा
प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीदी-बिक्री पर लगाया गया 1 प्रतिशत टैक्स अब खत्म होने जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा चार माह पहले शुरू की गई इस व्यवस्था से पुरानी कार, बाइक और ट्रक खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था। शो-रूम कीमत के आधार पर टैक्स वसूली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
रायपुर। राज्य सरकार पुराने वाहनों की बिक्री पर लग रहे 1 प्रतिशत टैक्स को वापस लेने की तैयारी में है। परिवहन विभाग ने करीब चार महीने पहले ट्रक, कार और दोपहिया सहित सभी प्रकार के पुराने वाहनों के नामांतरण पर यह टैक्स लागू किया था। अब इसे अव्यावहारिक मानते हुए खत्म करने का निर्णय लिया जा रहा है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत वाहन चाहे 10 से 15 वर्ष पुराना क्यों न हो, उस पर टैक्स शो-रूम कीमत के आधार पर लिया जा रहा है। परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में 1 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान जोड़े जाने के बाद नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया तभी पूरी हो रही है, जब यह राशि जमा की जाए। उदाहरण के तौर पर, 10 लाख रुपए की मूल कीमत वाले वाहन पर 10 हजार रुपए अतिरिक्त टैक्स देना पड़ रहा है।
वाहनों की खरीद-बिक्री की कोई तय सीमा नहीं है। एक ही वाहन कई बार बिकने पर हर बार 1 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा था, जिससे आम उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ी। खासकर 6 से 10 लाख रुपए की श्रेणी वाली पुरानी कारों के खरीदारों पर इसका अधिक असर पड़ा। जहां नामांतरण की सरकारी फीस करीब 22 से 23 सौ रुपए है और अन्य खर्च मिलाकर लगभग 3 हजार रुपए में प्रक्रिया पूरी हो जाती है, वहीं 1 प्रतिशत टैक्स जुड़ने से कुल खर्च 6 से 10 हजार रुपए तक बढ़ गया।
राज्य में हर वर्ष औसतन डेढ़ लाख से अधिक पुराने वाहनों की बिक्री होती है। इनमें आधे से ज्यादा दोपहिया वाहन होते हैं, लगभग 25 प्रतिशत कारें और शेष मालवाहक व बड़े वाहन शामिल हैं। ऐसे में इस टैक्स का व्यापक असर देखा गया।
परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों ने भी शुरुआत से ही इस निर्णय को अव्यावहारिक बताया था। उनका कहना है कि शो-रूम कीमत को आधार बनाना तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि वाहन की वास्तविक बाजार कीमत उम्र और स्थिति के अनुसार काफी कम हो जाती है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस निर्णय को जल्द ही औपचारिक रूप से वापस लेने की घोषणा की जाएगी। सरकार का मानना है कि आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।