जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और शारीरिक गतिविधि की कमी से बढ़ रहा खतरा; समय पर पहचान और सही जीवनशैली से बचाव संभव
फैटी लिवर को अक्सर शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता है, लेकिन अब बिना शराब पीने वाले युवाओं में भी यह तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार जंक फूड, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित जीवनशैली के कारण नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
नई दिल्ली (ए)। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) तेजी से आम होती जा रही है। पहले इसे शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बिना शराब पीने वाले लोगों, खासकर युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि शरीर दुबला-पतला होने के बावजूद पेट के आसपास चर्बी बढ़ रही हो, गर्दन मोटी लगने लगे या लगातार थकान महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये संकेत फैटी लिवर की ओर इशारा कर सकते हैं।
रिसर्च बताती है कि यह बीमारी अब वैश्विक स्तर पर बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ यूरोप’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस में करीब दो करोड़ लोग नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर से प्रभावित हैं, लेकिन लगभग 75 प्रतिशत लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है। वहीं ‘जर्नल ऑफ हेपेटोलॉजी’ के अनुसार दुनिया की करीब 38 प्रतिशत आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है, जिनमें लगभग 25 प्रतिशत लोग शराब नहीं पीते।
भारत में भी स्थिति चिंताजनक है। हेल्थ स्टडीज के अनुसार शहरी भारत के 30 से 40 प्रतिशत लोग किसी न किसी स्तर की फैटी लिवर समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जंक फूड, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन, कम शारीरिक गतिविधि और बढ़ता मोटापा इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
गुरुग्राम के नारायणा हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. संजय गोजा के अनुसार, नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति शराब नहीं पीता, फिर भी उसके लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। यह समस्या अक्सर मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से जुड़ी होती है, जैसे पेट के आसपास चर्बी, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल।
विशेषज्ञों के मुताबिक एल्कोहलिक और नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर दोनों में लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होता है, लेकिन कारण अलग होते हैं। एल्कोहलिक फैटी लिवर ज्यादा शराब पीने से होता है, जबकि नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर मोटापा, डायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और कम शारीरिक गतिविधि जैसी वजहों से विकसित होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस समस्या को समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है।