UV किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन जरूरी, एक्सपर्ट बोले—गलत चुनाव से हो सकता है स्किन डैमेज
गर्मियों की चिलचिलाती धूप सिर्फ असहजता ही नहीं बढ़ाती, बल्कि त्वचा को गंभीर नुकसान भी पहुंचा सकती है। ऐसे में सही SPF वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि स्किन को अल्ट्रावॉयलेट किरणों के असर से बचाया जा सके।
नई दिल्ली (ए)। गर्मियों में घर से बाहर निकलते ही तेज धूप और तपती गर्मी का सामना करना पड़ता है। सूर्य की किरणों में मौजूद अल्ट्रावॉयलेट (UV) रेज धीरे-धीरे त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे टैनिंग, सनबर्न और समय से पहले झुर्रियां जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में SPF युक्त सनस्क्रीन त्वचा की सुरक्षा के लिए एक जरूरी कवच बनकर उभरता है।
कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. विनोद विज के अनुसार, SPF यानी सन प्रोटेक्शन फैक्टर एक ऐसी रेटिंग है, जो बताती है कि कोई सनस्क्रीन UVB किरणों से त्वचा को कितनी देर तक बचा सकता है। जितना अधिक SPF होगा, उतनी ही ज्यादा देर तक स्किन सुरक्षित रहती है।
सनस्क्रीन क्रीम त्वचा पर एक पतली परत बनाकर UV किरणों के प्रभाव को कम करती है। यही कारण है कि धूप में निकलने से पहले इसका उपयोग करना बेहद जरूरी माना जाता है।
अक्सर लोग सनस्क्रीन पर लिखे SPF 15, 30 या 50 को लेकर भ्रमित रहते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि SPF 30 करीब 97% UVB किरणों से सुरक्षा देता है, जबकि SPF 50 लगभग 98% तक बचाव करता है। यानी दोनों के बीच सुरक्षा का अंतर बहुत कम होता है।
ऐसे में अगर रोजाना कम समय के लिए ही धूप में निकलना हो, तो SPF 30 भी पर्याप्त होता है। वहीं लंबे समय तक बाहर रहने या तेज धूप में काम करने वालों के लिए ज्यादा SPF फायदेमंद हो सकता है।
सनस्क्रीन न लगाने की स्थिति में त्वचा को सनबर्न, डार्क स्पॉट्स, पिग्मेंटेशन और समय से पहले एजिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए स्किन टाइप के अनुसार सही सनस्क्रीन का चयन और नियमित उपयोग बेहद जरूरी है।