विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी, अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर वॉकआउट; मंत्री के जवाबों से असंतोष
छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही बुधवार को जमीन आवंटन, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण और जंबूरी आयोजन में कथित अनियमितताओं के मुद्दों पर गरमा गई। विपक्ष ने सरकार को कई सवालों में घेरा और जवाबों से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे के बीच कार्यवाही प्रभावित रही। सस्ती दर पर उद्योगों को जमीन आवंटन, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण और बालोद जंबूरी आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा।
जमीन आवंटन पर घिरी सरकार
उद्योगों को कम दर पर जमीन दिए जाने का मामला सदन में सबसे ज्यादा गरमाया। खल्लारी विधायक द्वारकाधीश यादव और कांग्रेस विधायक चातुरी नंद ने सवाल उठाया कि महासमुंद जिले में 253 एकड़ जमीन महज करीब 5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से 99 साल की लीज पर कैसे दी गई।
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब में कहा कि यह आवंटन औद्योगिक नीति के तहत और सौर ऊर्जा परियोजना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को नियमसम्मत बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए जमकर हंगामा किया।
जंबूरी आयोजन में अनियमितता के आरोप
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बालोद में हुए जंबूरी आयोजन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया और कुछ ही दिनों में पूरा भी कर लिया गया।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब में कहा कि आयोजन से जुड़े अलग-अलग कार्यों की प्रक्रिया अलग थी और सभी निर्णय राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए थे। उन्होंने अनियमितता से इनकार करते हुए कहा कि जांच वहीं होती है, जहां घोटाले के प्रमाण हों।
युक्तियुक्तकरण पर भी उठा सवाल
भाजपा विधायक सुनील सोनी ने स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद खाली पड़े भवनों के उपयोग और उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठाए। मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि 10,538 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है, जिनमें अधिकांश को एक परिसर में मर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि शेष भवनों के उपयोग के लिए नए सत्र में योजना बनाई जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां मरम्मत व संसाधनों की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर टकराव
अतिथि शिक्षकों के वेतन और नियमितीकरण को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण प्रस्तावित नहीं है और उन्हें उपस्थिति के आधार पर 20 हजार रुपए प्रतिमाह भुगतान किया जाता है। विपक्ष ने इसे चुनावी वादों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया और मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया।
पूर्व नक्सलियों ने देखी कार्यवाही
इस बीच, आत्मसमर्पण कर चुके 140 पूर्व नक्सली भी विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे। इनमें 54 महिलाएं और 86 पुरुष शामिल थे।