सरकारी योजनाओं से आर्थिक, सामाजिक और नेतृत्व के क्षेत्र में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, आत्मनिर्भरता को मिल रहा बल
भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक परिवर्तन का आधार बन चुका है। केंद्र सरकार की विभिन्न पहलें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उन्हें निर्णय लेने की मुख्यधारा में स्थापित कर रही हैं।
रायपुर। देश में महिला सशक्तिकरण की अवधारणा अब एक समग्र और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण के रूप में विकसित हो चुकी है, जिसमें जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को केंद्र में रखा गया है। केंद्र सरकार की योजनाएं अब केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी कदम बन चुकी हैं।
स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने उल्लेखनीय सुधार किए हैं। फरवरी 2026 तक मातृ वंदना योजना के तहत 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता प्रदान की जा चुकी है। वहीं, सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। आंगनवाड़ी नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक पोषण सेवाएं पहुंच रही हैं, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर में भी कमी दर्ज की गई है।
“पोषण भी, पढ़ाई भी” अभियान और सक्षम आंगनवाड़ी योजना के जरिए जमीनी स्तर पर सेवाओं को मजबूत किया गया है।
आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया जैसी पहलों ने महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाया है। जन धन खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से अधिक है, जबकि मुद्रा योजना के तहत दिए गए ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को लाभ मिला है।
ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी निभा रही हैं। “लखपति दीदी” और “नमो ड्रोन दीदी” जैसी योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भरता के साथ तकनीकी रूप से भी सशक्त बना रही हैं।
दैनिक जीवन की गरिमा को सुदृढ़ करने के लिए आवास, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में व्यापक बदलाव लाया है। करोड़ों घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जबकि गैस कनेक्शन और शौचालय निर्माण ने स्वास्थ्य और सम्मान दोनों सुनिश्चित किए हैं।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी योजनाओं ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और तकनीकी शिक्षा में भी उनका दखल मजबूत हुआ है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति के तहत वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और SHe-Box पोर्टल जैसे तंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे लाखों महिलाओं को सहायता और सुरक्षा मिली है।
समग्र रूप से देखा जाए तो भारत में महिला सशक्तिकरण अब एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक बदलाव का आधार बन चुका है। महिलाएं न केवल परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि देश की विकास यात्रा में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। यही “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” का वास्तविक स्वरूप है, जिसमें नारी शक्ति को राष्ट्र शक्ति के रूप में स्थापित किया जा रहा है।