हर साल 5 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलेगा वर्क वीजा, निवेश और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे
भारत और न्यूजीलैंड के बीच आज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस समझौते से अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 5 हजार वर्क वीजा और निवेश के बड़े अवसर खुलेंगे।
नई दिल्ली (ए)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज दिल्ली के भारत मंडपम में साइन होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले शामिल होंगे। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी में बड़ा कदम माना जा रहा है।
समझौते का प्रमुख उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 2.4 अरब डॉलर का है।
इस डील के तहत न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विस और इनोवेशन सेक्टर में 20 अरब डॉलर (करीब 1.8 लाख करोड़ रुपए) तक निवेश करेगा। इससे भारत में रोजगार सृजन, उद्योग विस्तार और नई तकनीकों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारतीय पेशेवरों को बड़ा लाभ
सर्विस सेक्टर में भारत को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। न्यूजीलैंड अब हर वर्ष 5 हजार भारतीय प्रोफेशनल्स को अस्थायी रोजगार वीजा जारी करेगा। इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों के साथ आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी शामिल होंगे। यह वीजा तीन साल की अवधि के लिए मान्य रहेगा।
किसानों और MSME हितों की सुरक्षा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। डेयरी उत्पाद, चीनी, प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, मसाले और खाद्य तेल पर पहले की तरह शुल्क लागू रहेगा।
इन उत्पादों पर मिलेगी राहत
समझौते के तहत न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर टैरिफ में कमी या समाप्ति का प्रावधान किया गया है। ऊन, कोयला, लकड़ी और भेड़ के मांस जैसे उत्पादों को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। वहीं कीवीफ्रूट, सेब, वाइन, चेरी, एवोकैडो और शहद जैसे उत्पादों पर कोटा आधारित शुल्क राहत दी जाएगी।
फार्मा कंपनियों को मिलेगा फायदा
भारतीय दवा और मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार अब अधिक आसान होगा। वहां की नियामक एजेंसियां भारत की GMP (गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) रिपोर्ट को मान्यता देंगी। इससे मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी और अनुपालन लागत घटेगी।
भारत की तीसरी बड़ी रणनीतिक डील
भारत ने ‘फाइव आइज’ समूह के तीन देशों- ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते अंतिम रूप दे दिए हैं। इससे पहले भारत यूएई, मॉरीशस और ईएफटीए देशों के साथ भी ऐसे समझौते कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत के वैश्विक व्यापार विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी।