युद्ध और वैश्विक संकट से निपटने की तैयारी, मंगलुरु में बनेगा भूमिगत तेल भंडार
वैश्विक तनाव और तेल आपूर्ति पर बढ़ते जोखिम के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में नया इमरजेंसी ऑयल रिजर्व बनाने का फैसला लिया है, जिससे संकट के समय तेल आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नई दिल्ली (ए)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने नया रणनीतिक तेल भंडार विकसित करने की योजना बनाई है। अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान सामने आए तेल संकट के अनुभव के बाद यह निर्णय लिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 15 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस रणनीतिक ऑयल रिजर्व का निर्माण ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) की ओर से किया जाएगा। यह भूमिगत तेल भंडार कर्नाटक के मंगलुरु में तैयार किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि इस भंडार में करीब 1.28 लाख बैरल तेल संग्रहित किया जा सकेगा। इससे युद्ध, अंतरराष्ट्रीय तनाव या अचानक आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियों में देश को राहत मिलेगी। अनुमान है कि यह रिजर्व आपात स्थिति में लगभग 11 दिनों तक तेल की जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है।
सरकार का मानना है कि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट की स्थिति में ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे रणनीतिक कदम आवश्यक हैं। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति तंत्र को मजबूती मिलेगी।