FMCG, मेटल और रियल्टी शेयरों में बिकवाली हावी, कच्चे तेल की कीमत 79 डॉलर के करीब पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आया। वैश्विक संकेतों की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। सबसे अधिक दबाव FMCG, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर रहा।
मुंबई (ए)। सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए सुस्त रही। सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक टूटकर 77,200 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 50 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,150 के आसपास कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
कारोबार के दौरान FMCG, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए कई प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 4 प्रतिशत बढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। माना जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान के बाद ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके विपरीत, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में मजबूती दर्ज की गई थी, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी-500 बढ़त के साथ बंद हुए थे।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहने के बावजूद बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा। पिछले सात कारोबारी दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,427 करोड़ रुपये और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 4,484 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 828 अंक चढ़कर 77,569 और निफ्टी 244 अंक की बढ़त के साथ 24,206 के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को आई गिरावट को विशेषज्ञ वैश्विक परिस्थितियों के बीच सामान्य मुनाफावसूली और सतर्क निवेशक रुख का परिणाम मान रहे हैं।