तिब्बत से आई बाढ़ ने भोटेकोशी नदी का रौद्र रूप दिखाया; 300 से ज्यादा भारतीयों की तलाश जारी, चीन की रेस्क्यू टीम भी पहुंची
काठमांडू (ए)। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह पहाड़ का बड़ा हिस्सा नदी में गिरने से अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। हादसे में नेपाल और तिब्बत में अब तक 178 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। करीब 1,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय शामिल हैं। खराब मौसम और मलबे से बाधित रास्तों के बावजूद राहत और बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला, इनमें 21 भारतीय हैं।

पहाड़ का हिस्सा नदी में गिरने से आया तेज बहाव
नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेंदे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों से भरा पहाड़ का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसके बाद नदी का पानी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। बाढ़ की तेज धार ने रास्ते में आने वाले मकानों और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया।

भूकंप जैसा महसूस हुआ था झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटका महसूस किया गया। शुरुआती जानकारी में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। बाद में जांच में सामने आया कि यह झटका वास्तव में बड़े पैमाने पर हुए लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था। USGS ने बाद में इसे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके के रूप में स्पष्ट किया।
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तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक तिब्बत में 550 से ज्यादा लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। उधर नेपाल में भी सैकड़ों लोगों की तलाश जारी है। मलबे, कीचड़ और खराब मौसम के कारण बचाव दल को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
22 घंटे बाद पहुंची चीनी रेस्क्यू टीम
बाढ़ के कारण रास्ता बंद होने से करीब 22 घंटे तक बचाव दल प्रभावित क्षेत्र तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद चीनी रेस्क्यू टीम ग्यिरोंग पोर्ट पहुंची। शुरुआती दल में 141 सदस्य शामिल हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में राहत अभियान के लिए Mi-171 हेलिकॉप्टर भी तैनात किया गया है। टीम अब मलबे और कीचड़ में फंसे लोगों की तलाश कर रही है।