500 से अधिक व्यापारिक संगठनों के एकजुट होने का दावा, डिजिटल पेमेंट शुल्क वापस लेने की मांग
नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर व्यापारिक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रविंद्र मंगवे के अनुसार, देशभर के 500 से अधिक व्यापारिक संगठन इस मुद्दे पर एक मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं। संगठनों ने शुल्क के विरोध में 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि रिटेल कारोबारी और डिस्ट्रीब्यूटर पहले से ही सीमित मार्जिन पर कारोबार करते हैं। ऐसे में डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से उनकी लागत बढ़ सकती है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल ने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था का मकसद लेनदेन को सरल और सुविधाजनक बनाना होना चाहिए, न कि व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना।
वहीं, ऑल इंडिया एडिबल ऑयल ट्रेडर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने UPI को पारदर्शी भुगतान व्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, डिजिटल भुगतान को अपनाने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
‘नो UPI डे’ पर नहीं होगा डिजिटल भुगतान
व्यापारी संगठनों के ऐलान के मुताबिक 2 अक्टूबर को देशभर में व्यापारी और दुकानदार UPI के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत चार्ज के विरोध में प्रदर्शन की बात भी कही गई है।
विरोध के दौरान व्यापारी QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट उपकरणों को काले कपड़े से ढककर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं।