10 जनपथ में प्रस्तावित बैठक में कानूनी प्रक्रिया और पीड़ित परिवारों से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा, सोनिया गांधी के भी शामिल होने की संभावना
रायपुर। झीरम घाटी हमले के मामले में विशेष एनआईए अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पीड़ित परिवारों के सदस्य शनिवार को राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। प्रस्तावित बैठक नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ में होगी। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के शामिल होने की जानकारी है। बैठक में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और पीड़ित परिवारों से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है।
झीरम घाटी मामले में 13 साल बाद विशेष एनआईए अदालत के फैसले के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश नेताओं और पीड़ित परिवारों की राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठक प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार शनिवार को होने वाली इस बैठक में राहुल गांधी के साथ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और हमले में प्रभावित परिवारों के सदस्य शामिल होंगे।
बैठक में कर्मा परिवार और उमेश पटेल के परिवार से जुड़े सदस्यों के भी शामिल होने की जानकारी है। सोनिया गांधी के भी बैठक में मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, बैठक में शामिल होने वाले सभी लोगों की अंतिम सूची की आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर होनी बाकी है।
कानूनी प्रक्रिया पर होगी चर्चा
विशेष एनआईए अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में अदालत के फैसले के बाद उपलब्ध कानूनी विकल्प, पीड़ित परिवारों की मांगों और आगे की कार्रवाई से जुड़े विषयों पर विचार किया जा सकता है।
13 साल बाद आया अदालत का फैसला
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, उदय मुदलियार सहित कई लोग मारे गए थे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार हमले में कुल 29 लोगों की मौत हुई थी।
मामले की जांच एनआईए ने की। 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने सुनवाई का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
मृत्युदंड की सजा के बाद दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का कानूनी विकल्प है। रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए 30 दिन का समय दिया गया है। ऐसे में आगामी बैठक में अदालत के फैसले के बाद की कानूनी स्थिति और पीड़ित परिवारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।