कुवैत के झंडे वाले जहाज पर सवार थे भारतीय; 8 महीने में समुद्री हमलों में 11 भारतीय नाविकों की मौत, 100 से ज्यादा प्रभावित
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को कुवैत के झंडे वाले कच्चे तेल से भरे टैंकर एमटी काजिमाह III पर मिसाइल हमला हुआ। जहाज में सवार पांच भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को इसकी पुष्टि की। हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पिछले आठ महीनों में इस क्षेत्र में हुए हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक प्रभावित हुए हैं।
मस्कट (ए)। होर्मुज जलडमरूमध्य में शुक्रवार को हुए मिसाइल हमले का निशाना कुवैत के झंडे वाला तेल टैंकर एमटी काजिमाह III बना। जहाज कच्चे तेल से भरा हुआ था और अफ्रीका की ओर जा रहा था। हमले के दौरान इसमें पांच भारतीय नाविक भी सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को घटना की जानकारी दी। फिलहाल हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है।
होर्मुज क्षेत्र में समुद्री जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों से भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। फरवरी से अब तक इन घटनाओं में 100 से अधिक भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इनमें 11 नाविकों की मौत हो चुकी है।
खाड़ी क्षेत्र में 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को बताया था कि खाड़ी क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से अधिक भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। फारस की खाड़ी में फिलहाल भारत के झंडे वाले छह व्यावसायिक जहाज मौजूद हैं। इसके अलावा छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं।
उन्होंने बताया कि भारतीय शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के सहयोग से नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर दूतावास उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए जरूरी कदम उठाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भी उठा था नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुद्री क्षेत्र में उभरते खतरे पहले से मौजूद जमीनी संकटों को और गंभीर बना रहे हैं। इन हमलों में भारतीयों के साथ अन्य देशों के नाविकों की भी जान गई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि समुद्री मार्गों पर शांति और सुरक्षा बनाए रखना जरूरी है, ताकि आम लोगों की जरूरतों के लिए काम कर रहे जहाजों के चालक दल सुरक्षित रहें और ऊर्जा आपूर्ति के साथ वैश्विक व्यापार भी प्रभावित न हो।