नीदरलैंड में रहती हैं 43 वर्षीय सुनीता, पिता ने निधन से पहले बताया था मां जमुना दत्ता के रायपुर में होने का पता; पुलिस और प्रशासन से मां को खोजने में मदद मांगी
मां से बिछड़ने के 42 साल बाद एक बेटी उन्हें तलाशते हुए हजारों किलोमीटर दूर से रायपुर पहुंची है। नीदरलैंड में रहने वाली 43 वर्षीय सुनीता अब्दुला को पिछले साल अपने पिता से पता चला कि उनकी मां जमुना दत्ता जीवित हैं और रायपुर में रहती हैं। बचपन की धुंधली यादों और मां की तस्वीर तक के बिना सुनीता अब शहर के अलग-अलग इलाकों में उन्हें तलाश रही हैं। उन्होंने मां और छोटी बहन शर्मिला से मिलाने के लिए पुलिस, प्रशासन और शासन से मदद की अपील की है।
पिता की आखिरी बात ने जगाई मां से मिलने की उम्मीद
सुनीता के जीवन में मां से जुड़ी यादें लगभग नहीं हैं। वह महज छह महीने की थीं, जब उनसे मां का साथ छूट गया। इसके बाद उनका पालन-पोषण चाचा और बुआ ने किया। समय बीतने के साथ उनकी शादी हुई और वह चार बच्चों की मां बनीं। फिलहाल वह नीदरलैंड के लिम्बर्ग प्रांत के लैंडग्राफ में रहती हैं और वहां की सरकार में अनुवादक के रूप में काम करती हैं।
वर्ष 2025 में पिता अब्दुला मुश्तफा की तबीयत बिगड़ने पर सुनीता उनसे मिलने सऊदी अरब गई थीं। इसी दौरान पिता ने उन्हें बताया कि उनकी मां जमुना दत्ता जीवित हैं और रायपुर में रहती हैं। उन्होंने सुनीता को छोटी बहन शर्मिला के बारे में भी जानकारी दी। वर्षों से मां के बारे में अनजान सुनीता के लिए यह जानकारी भावुक कर देने वाली थी। पिता की बताई बातों के आधार पर उन्होंने मां को खोजने का फैसला किया।
इंटरनेट पर नहीं मिली जानकारी, खुद पहुंचीं रायपुर
सुनीता ने मां के बारे में इंटरनेट पर जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने खुद रायपुर आने का निर्णय लिया। करीब 7200 किलोमीटर का सफर तय कर वह शहर पहुंचीं। यहां फाफाडीह, स्टेशन रोड और बैरनबाजार सहित कुछ इलाकों में मां की तलाश कर चुकी हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
सुनीता के पास मां से संबंधित कुछ दस्तावेज हैं। इन्हीं के आधार पर वह पुराने पते और दूसरी जानकारियों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। मां का पता लगाने के लिए उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर और शासन से भी सहायता मांगी है।
सऊदी अरब में हुई थी माता-पिता की मुलाकात
सुनीता के मुताबिक, उनकी मां जमुना दत्ता मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली थीं। नौकरी के सिलसिले में वह सऊदी अरब गई थीं। वहीं वर्ष 1981 में उनकी मुलाकात अब्दुला मुश्तफा से हुई और बाद में दोनों ने शादी कर ली। सुनीता के जन्म के करीब छह महीने बाद मां उनसे अलग हो गईं। हालांकि, इसके बाद भी उनके माता-पिता के बीच कभी-कभी मुलाकात और बातचीत होती रही। सुनीता के जन्म के लगभग तीन साल बाद उनकी छोटी बहन शर्मिला का जन्म हुआ।
1991 में रायपुर आए थे पिता
सुनीता को पिता ने बताया था कि नाना की नौकरी के कारण जमुना का परिवार रायपुर में रहने लगा था। अब्दुला और जमुना के बीच फोन पर संपर्क बना हुआ था। वर्ष 1991 में अब्दुला सऊदी अरब से रायपुर आए और जमुना से मिले। उस समय सुनीता की छोटी बहन शर्मिला फाफाडीह स्थित सेंट जेवियर स्कूल में पढ़ती थी। इस मुलाकात के बाद अब्दुला दोबारा रायपुर नहीं आए। धीरे-धीरे दोनों के बीच संपर्क टूट गया और सुनीता को भी मां तथा बहन के बारे में कोई नई जानकारी नहीं मिल सकी।
14 दिन के वीजा में मां से मिलने की आस
सुनीता महज 14 दिन के वीजा पर रायपुर आई हैं। उनके पास समय सीमित है, लेकिन मां और बहन से मिलने की उम्मीद उन्हें लगातार तलाश करने के लिए प्रेरित कर रही है। वह चाहती हैं कि लौटने से पहले मां को गले लगा सकें और अपनी छोटी बहन से मिल सकें। भाषा अलग होने के बावजूद उन्हें विश्वास है कि मां उनके भाव समझ सकेंगी। 42 साल से अधूरे इस रिश्ते को फिर से जोड़ने की उम्मीद में सुनीता अब प्रशासन की मदद और किसी सुराग का इंतजार कर रही हैं।