ED का आरोप – पूर्व आबकारी मंत्री लखमा घोटाले के मास्टरमाइंड, 72 करोड़ की अवैध कमाई, 3773 पन्नों का चार्जशीट कोर्ट में पेश
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा दावा किया है। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सिंडिकेट का मुखिया बताया गया है। ईडी के मुताबिक, लखमा को हर महीने दो करोड़ रुपए की रिश्वत मिलती थी और उन्होंने शराब नीति में बदलाव कर सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया। इस मामले में रायपुर कोर्ट में उनकी पेशी आज हो रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले में एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर की विशेष अदालत में 3773 पन्नों की चार्जशीट दाखिल करते हुए दावा किया है कि पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा न केवल इस घोटाले की जानकारी रखते थे, बल्कि इसके मुख्य संचालक भी थे।
ED के अनुसार, लखमा को हर माह दो करोड़ रुपए बतौर कमीशन मिलते थे। तीन वर्षों में यह रकम 72 करोड़ रुपए तक पहुंची, जिसका उपयोग उनके बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और सुकमा स्थित कांग्रेस भवन में हुआ।
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि शराब दुकानों की जांच से पहले अधिकारियों को वरिष्ठ स्तर से अनुमति लेनी होती थी, जो इस घोटाले में उच्चस्तरीय मिलीभगत को दर्शाता है। ईडी का दावा है कि लखमा की भूमिका शराब नीति में बदलाव तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने FL-10 लाइसेंस प्रणाली लागू कर सिंडिकेट को खुला लाभ दिलाया। अब तक इस घोटाले में 21 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है, जिनमें अनवर ढेबर, अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन और कई प्रमुख कंपनियों व व्यापारिक संस्थाओं के नाम शामिल हैं।
लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था और वे 21 जनवरी से रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। आज उनकी कोर्ट में पेशी हो रही है, जहां उनकी न्यायिक हिरासत को बढ़ाया जा सकता है।