पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सख्ती से बौखलाया पाकिस्तान, परमाणु धमकियों और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार के बावजूद कूटनीतिक रूप से अलग-थलग
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़े सैन्य और कूटनीतिक रुख के संकेत दिए हैं। पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक ‘धमकी की नीति’ अपनाते हुए परमाणु हथियारों का हवाला दिया और चीन, ईरान, तुर्की जैसे देशों से समर्थन मांगा, लेकिन उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। नाकामी के बाद अब पाकिस्तान अमेरिका से हस्तक्षेप की गुहार लगा रहा है।
नई दिल्ली (ए)। भारत के जम्मू-कश्मीर स्थित पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाक रिश्तों को एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर ला खड़ा किया है। इस हमले के बाद पाकिस्तान ने अपनी पुरानी रणनीति दोहराई—परमाणु हमले की धमकी, भारत को युद्ध की चेतावनी और सिंधु जल समझौते के उल्लंघन की धमकियां। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की।
चीन और तुर्की से उसे केवल सांकेतिक समर्थन मिला, जबकि ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली मुस्लिम देश तटस्थ बने रहे। इस स्थिति ने पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग कर दिया। भारत के खिलाफ सैन्य मोर्चा खोलने का साहस नहीं जुटा पाने के कारण अब पाकिस्तान ने अमेरिका का दरवाजा खटखटाया है।
भारत ने इस हमले के बाद स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिए हैं कि भारत की चेतावनियां केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहेंगी, और यदि आवश्यक हुआ तो कार्रवाई भी की जाएगी।
इस घटनाक्रम में जहां भारत ने संयम के साथ सख्त रुख अपनाया है, वहीं पाकिस्तान की रणनीति विफल होती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान अपनी आतंकवाद समर्थक नीतियों की समीक्षा नहीं करता, तो उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी अधिक अलगाव झेलना पड़ सकता है।