6 मई तक जारी रहेगा मौसम का कहर, 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं, किसानों को भारी नुकसान
छत्तीसगढ़ में मई की शुरुआत तूफानी मौसम के साथ हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का सिलसिला बना हुआ है। इसका असर न सिर्फ जनजीवन पर पड़ा है, बल्कि किसानों की तैयार खड़ी फसलें भी तबाह हो गई हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम का मिज़ाज एक बार फिर बिगड़ गया है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते प्रदेश के कई इलाकों में तेज़ आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि देखी जा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति आगामी 6 मई तक बनी रह सकती है। इस दौरान कुछ स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।
शनिवार को रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर सहित अन्य जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई, जबकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही क्षेत्र में ओले गिरे। इस बदले मौसम से तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
कृषि पर पड़ा भारी असर
तेज हवाओं और बारिश से सबसे अधिक नुकसान किसानों को हुआ है। दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र के धौराभाठा गांव में करीब 500 एकड़ में उगाई जा रही केले, आम, पपीता और चीकू की फसल तेज आंधी की वजह से पूरी तरह बर्बाद हो गई। यहां ऑर्गेनिक खेती कर रही जेएस फर्म के किसान राजेश पुनिया ने बताया कि उनका अनुमानित नुकसान 70 से 80 लाख रुपये तक हो सकता है।
बिजली व्यवस्था चरमराई
आंधी-तूफान से रायपुर, भिलाई, दुर्ग सहित कई इलाकों में बिजली के पोल और तार गिर गए, जिससे आपूर्ति बाधित हो गई। पावर कंपनी की टीम लगातार बहाली में जुटी रही। शुक्रवार शाम तक 80% आपूर्ति बहाल कर दी गई थी, जबकि शेष क्षेत्रों में देर रात तक सुधार कार्य चलता रहा।
प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नज़र रखते हुए राहत एवं मुआवजा की कार्यवाही शुरू की जा रही है।